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केंद्र का स्पष्टीकरण: पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज है

 नागरिकता का प्रमाण नहीं; 10 साल में 7 गुना बढ़े केंद्र नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने पासपोर्ट को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि देश की नागरिकता का […]

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  • June 25, 2026 6:51 am IST, Published 1 hour ago

 नागरिकता का प्रमाण नहीं; 10 साल में 7 गुना बढ़े केंद्र

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने पासपोर्ट को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि देश की नागरिकता का अंतिम प्रमाण पत्र। यह बात सरकार ने 14वें ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कही।

मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को आसान बनाने के लिए जारी किया जाता है। हालांकि, यह नियमतः सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कानूनी रूप से अकेले इसे नागरिकता स्थापित करने वाला दस्तावेज नहीं माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है ऐसा ही रुख साफ: इससे पहले देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) भी मतदाता सूची से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर चुकी है कि आधार कार्ड केवल पहचान (Identity) और निवास का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं। ठीक इसी तरह अब पासपोर्ट को लेकर भी स्थिति साफ की गई है।

राष्ट्रीयता और नागरिकता में क्या है अंतर?

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद राष्ट्रीयता (Nationality) और नागरिकता (Citizenship) का बुनियादी अंतर समझना जरूरी है:

  • राष्ट्रीयता: यह दर्शाती है कि आपका मूल या संबंध किस देश से है। यह मुख्य रूप से आपकी वैश्विक पहचान (Identity) तय करती है।

  • नागरिकता: यह बताती है कि उस देश के संविधान के तहत आपको कौन-कौन से कानूनी, राजनीतिक और मौलिक अधिकार मिले हैं। नागरिकता व्यक्ति के अधिकार और देश के प्रति उसकी जिम्मेदारियां तय करती है।

बड़ी उपलब्धि: 10 साल में 7 गुना बढ़े केंद्र, करोड़ों ई-पासपोर्ट जारी

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवाओं में आए क्रांतिकारी बदलावों और आंकड़ों को भी सामने रखा:

  • केंद्रों में भारी बढ़ोतरी: पिछले 10 वर्षों में देश के भीतर पासपोर्ट सेवा केंद्रों और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है।

  • चिप आधारित ई-पासपोर्ट: आधुनिक सुरक्षा मानकों से लैस चिप आधारित ई-पासपोर्ट (e-Passport) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अब तक 1.47 करोड़ ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं।

  • तेज हुआ काम: पासपोर्ट आवेदन को प्रोसेस करने और उसे निपटाने का औसत समय अब घटकर मात्र 5 से 6 दिन रह गया है।

  • ग्लोबल रीच: भारतीय पासपोर्ट की ताकत भी वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। वर्ष 2019 में जहां केवल 16 देश भारतीयों को वीजा-फ्री एंट्री देते थे, वहीं अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश की सुविधा दे रहे हैं।

क्या पासपोर्ट रद्द होने से खत्म हो जाती है नागरिकता?

मंत्रालय ने इस भ्रांति को भी दूर किया कि पासपोर्ट रद्द होने का मतलब नागरिकता का खत्म होना नहीं है। पासपोर्ट अधिनियम (Passport Act) के तहत गलत जानकारी देने, कानूनी मामलों या सुरक्षा कारणों से किसी का पासपोर्ट निलंबित या रद्द किया जा सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त करने या वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह अलग है, जो नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) के प्रावधानों के तहत ही संचालित होती है।

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