नयी दिल्ली: मार्च 2026 से लेकर मई 2026 तक कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर (19 किलो) की कीमतों में लगातार और अलग-अलग स्तर की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इन बदलावों ने खासकर होटल, ढाबा, कैटरिंग और छोटे-मझोले व्यवसायों की लागत पर सीधा असर डाला है, जहां गैस एक बुनियादी जरूरत है। मार्च की शुरुआत से ही कीमतों में हलचल देखी जाने लगी थी। 1 मार्च 2026 को सिलिंडर के दामों में ₹28 से ₹31 की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे उस समय सामान्य समायोजन माना गया। हालांकि, यह बढ़ोतरी कारोबारियों के लिए शुरुआती संकेत थी कि आने वाले दिनों में ईंधन लागत बढ़ सकती है। इसके ठीक कुछ ही दिनों बाद, 7 मार्च 2026 को कीमतों में ₹114.50 की एक और बढ़ोतरी हुई, जो पहले से अधिक स्पष्ट और असरदार थी। इस बढ़ोतरी ने छोटे व्यवसायों के लिए परिचालन लागत में तुरंत दबाव पैदा कर दिया। कई रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स ने अपनी कीमतों की समीक्षा शुरू कर दी।
इसके बाद अप्रैल की शुरुआत में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई। 1 अप्रैल 2026 को सिलिंडर के दामों में ₹195.50 से ₹218 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत बड़ी मानी गई, क्योंकि यह लगातार तीसरे महीने का असर था। इस दौरान कई व्यापारियों ने बताया कि मार्जिन पहले ही कम थे और अब लागत संभालना मुश्किल होता जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव मई की शुरुआत में देखने को मिला। 1 मई 2026 को कमर्शियल सिलिंडर की कीमत में लगभग ₹993 की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी छलांग माना जा रहा है। इस बढ़ोतरी ने पूरे कमर्शियल सेक्टर को झटका दिया, खासकर उन इकाइयों को जो रोज़ाना बड़ी मात्रा में गैस का उपयोग करती हैं।
लगातार चार महीनों में हो रही इन बढ़ोतरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कमर्शियल ईंधन की कीमतों में स्थिरता फिलहाल नजर नहीं आ रही। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि कई व्यवसाय अपनी बढ़ी हुई लागत को कीमतों में समायोजित करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। कुल मिलाकर, मार्च से मई 2026 के बीच की यह कीमतों की श्रृंखला कमर्शियल सेक्टर के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हो रही है, जहां हर नई बढ़ोतरी पहले से अधिक दबाव लेकर आ रही है।