• होम
  • देश
  • भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक!

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक!

हजारों संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर होने का दावा नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े हजारों संवेदनशील दस्तावेज लीक होने का दावा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर प्लांट से संबंधित दस्तावेज […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 15, 2026 5:46 pm IST, Published 30 minutes ago

हजारों संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर होने का दावा

नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े हजारों संवेदनशील दस्तावेज लीक होने का दावा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर प्लांट से संबंधित दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया है। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, कुडनकुलम परियोजना में यूनिट-3 और यूनिट-4 का निर्माण कार्य कर रही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर होस्ट किया गया था। रिलायंस ग्रुप ने पुष्टि की है कि योट्टा के सर्वर पर साइबर सेंधमारी हुई थी और इसकी सूचना संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है। हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-कौन सा डेटा प्रभावित हुआ है।

मई में हुई सेंध, जून में लीक का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, 29 मई 2026 को योट्टा ने अपने सर्वर पर संदिग्ध साइबर गतिविधि का पता लगाया था। कंपनी का कहना है कि उस समय हमले को रोक दिया गया था। इसके बाद जून के अंत में रिलायंस ने योट्टा को सूचित किया कि ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह डेटा चोरी कर डार्क वेब पर अपलोड करने का दावा कर रहा है।

बताया जा रहा है कि लगभग 8.58 लाख फाइलों में से करीब 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने का दावा किया गया है।

किन दस्तावेजों के लीक होने का दावा

हैकर्स द्वारा सार्वजनिक किए गए बताए जा रहे दस्तावेजों में कथित रूप से शामिल हैं:

  • पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट
  • सप्लायरों और ठेकेदारों की जानकारी
  • निरीक्षण और तकनीकी रिकॉर्ड
  • बैठकों से जुड़े दस्तावेज
  • परियोजना से संबंधित अन्य संवेदनशील फाइलें

जांच में जुटीं सरकारी एजेंसियां

घटना सामने आने के बाद न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरे मामले की संयुक्त समीक्षा कर रहे हैं। वहीं भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) भी साइबर हमले और कथित डेटा लीक की जांच में जुट गई है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता

साइबर और परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लीक हुए दस्तावेज वास्तविक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर परमाणु संयंत्र की सहायक प्रणालियों, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझ सकता है। इससे भविष्य में साइबर हमलों और सुरक्षा जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।

2019 में भी हुआ था साइबर हमला

यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना साइबर हमले की चपेट में आई हो। वर्ष 2019 में भी प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। हालांकि उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही थी और बिजली उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।

फिलहाल इस ताजा डेटा लीक मामले की जांच जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि लीक का दावा कितना सही है और संवेदनशील जानकारी वास्तव में कितनी प्रभावित हुई है।

Advertisement