भारत में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद अब केंद्र सरकार की प्राथमिकता दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर और उसके विस्तार के रूप में दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर केंद्रित है। प्रस्तावित लगभग 1700 किलोमीटर लंबा यह हाईस्पीड रेल मार्ग देश का सबसे बड़ा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनने की ओर अग्रसर है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को एक नई गति देगा।
योजना के अनुसार पहले 865 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। इसके बाद इसे वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी तक विस्तारित किया जाएगा। इस नेटवर्क के पूरा होने पर दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा, जो वर्तमान में रेल मार्ग से करीब 20 घंटे लेती है, भविष्य में लगभग 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी।
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर पर प्रस्तावित स्टेशन हजरत निजामुद्दीन, नोएडा, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी होंगे। इसके अलावा अयोध्या के लिए एक अलग हाईस्पीड लिंक की भी योजना बनाई गई है। जेवर एयरपोर्ट पर भूमिगत स्टेशन बनने का प्रस्ताव इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
रेल मंत्रालय और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) दिल्ली को देश का प्रमुख हाईस्पीड रेल हब बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके तहत दिल्ली से अहमदाबाद, अमृतसर-जम्मू और अन्य प्रमुख शहरों तक बुलेट ट्रेन कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी आगे बढ़ रही है।
सरकार की योजना केवल एक कॉरिडोर तक सीमित नहीं है। दिल्ली को भविष्य के राष्ट्रीय हाईस्पीड रेल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत कई प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी की रेल यात्रा में लगभग 11 से 12 घंटे लगते हैं। हाईस्पीड रेल शुरू होने के बाद यही सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह बदलाव हवाई यात्रा के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि स्टेशन शहरों के भीतर होंगे और एयरपोर्ट जैसी लंबी चेक-इन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
सरकार कई अन्य हाईस्पीड रेल परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। इनमें—
भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर प्रस्तावित है, जबकि भारत पहली बार अपनी स्वदेशी हाईस्पीड ट्रेन B35 भी विकसित कर रहा है। इसे 280 किमी प्रति घंटे की गति के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जबकि भविष्य में इसकी क्षमता 350 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाई जा सकती है।
हाईस्पीड रेल परियोजनाएं केवल यात्रा समय कम नहीं करेंगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देंगी। दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहरों के बीच तेज़ संपर्क से पूर्वी भारत और उत्तर भारत के आर्थिक गलियारों को बड़ा लाभ मिल सकता है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत का हाईस्पीड रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल हो सकता है।