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अल नीनो की दस्तक: भारत समेत दुनिया भर में 3 महीने सूखे की आशंका

केंद्र ने राज्यों को दिए जिलास्तर पर तैयारी के निर्देश नई दिल्ली: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक जलवायु को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र की इस मौसम एजेंसी के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्री जल के तेजी से गर्म होने के कारण जून से अगस्त के बीच अल नीनो […]

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  • June 3, 2026 6:17 am IST, Published 22 seconds ago

केंद्र ने राज्यों को दिए जिलास्तर पर तैयारी के निर्देश

नई दिल्ली: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक जलवायु को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र की इस मौसम एजेंसी के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्री जल के तेजी से गर्म होने के कारण जून से अगस्त के बीच अल नीनो सक्रिय होने की आशंका 80 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

नवंबर तक इस प्रणाली के 90 प्रतिशत या उससे अधिक मजबूत होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अल नीनो आगे चलकर और विकराल रूप ले सकता है, जिससे भारत सहित वैश्विक स्तर पर सूखा, बाढ़, भीषण लू (हीटवेव) और मौसम के अन्य खतरनाक रूप देखने को मिल सकते हैं।

इस चेतावनी को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को युद्ध स्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि सामान्य से कम मानसून और अल नीनो के इस संकट से निपटने के लिए तुरंत जिलास्तर पर आकस्मिक योजना (डिजास्टर प्लान) लागू की जाए।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बयान:

“राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलास्तर पर अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करें। इसके साथ ही, किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी तुरंत पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों और कॉल सेंटर सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ व मजबूत किया जाए।”

क्या है अल नीनो और क्यों आता है?

प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में जब सामान्य रूप से चलने वाली समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट (पेरू के पास) का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है। पानी के इसी तरह अत्यधिक गर्म होने की प्रक्रिया को अल नीनो कहा जाता है। यह प्रणाली वैश्विक हवाओं और बादलों के प्राकृतिक पैटर्न को बदल देती है, जिसके कारण दुनिया भर का मौसम पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।

समुद्र का पानी 6°C ज्यादा गर्म: वैज्ञानिकों की चिंता

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का पानी सामान्य तापमान से 6°C अधिक गर्म दर्ज किया गया है। समुद्र के भीतर जमा यह अतिरिक्त ऊष्मा (गर्मी) अब ऊपरी सतह को गर्म कर रही है, जिससे अल नीनो को और अधिक रफ्तार मिल रही है।

WMO ने आगाह किया है कि इससे पहले साल 2023-24 में आया अल नीनो इतिहास के पांच सबसे शक्तिशाली दौर में शामिल था, जिसने साल 2024 में वैश्विक तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस बार भी हालात चिंताजनक हो सकते हैं।

भारत में इन दो प्रणालियों (सिस्टम) से बच सकता है मानसून

WMO के विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के इस खतरे के बावजूद भारत में मानसून पूरी तरह प्रभावित होने से बच सकता है, बशर्ते हिंद महासागर और वायुमंडल में ये दो प्रणालियां सक्रिय भूमिका निभाएं:

  • 1. इंडियन ओशन डायपोल (IOD): इसे ‘हिंद महासागर का अल नीनो’ भी कहा जाता है। यदि आगामी महीनों में इसका चरण सकारात्मक (पॉजिटिव फेज) रहता है, तो यह अल नीनो के कारण पैदा होने वाले सूखे के प्रभाव को पूरी तरह बेअसर कर सकता है और भारत में अच्छी वर्षा कराने में सहायक होता है।

  • 2. मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO): यह बादलों और हवाओं का एक वैश्विक चक्र है जो भूमध्य रेखा के ऊपर लगातार घूमता रहता है। जब यह चक्र भारत के ऊपर से गुजरता है, तो यह कमजोर पड़ चुके मानसून में भी जान फूंक देता है और देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के दौर (स्पेल) लेकर आता है।

प्रभावित देशों को युद्ध स्तर पर तैयार रहने की चेतावनी

 

संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने प्रभावित होने वाले सभी देशों से अपनी तैयारियों को चाक-चौबंद रखने की अपील की है। संगठन ने कहा है कि भारत सहित उन सभी देशों की सरकारों, कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा विभागों को युद्ध स्तर पर सतर्क हो जाना चाहिए जहाँ सूखे की सबसे अधिक आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर दी गई सटीक चेतावनी और पूर्व-तैयारियों के माध्यम से ही कृषि को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है और लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

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