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LPG गैस संकट का देसी समाधान, अब कोयले से बनेगी सिंथेटिक नेचुरल गैस

ऊर्जा संकट और आयातित ईंधन पर बढ़ती निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें […]

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  • May 13, 2026 4:29 pm IST, Published 33 minutes ago

ऊर्जा संकट और आयातित ईंधन पर बढ़ती निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय ऑक्सीजन और पानी (भाप) की मदद से रासायनिक प्रक्रिया के जरिए गैस में बदला जाता है। इस प्रक्रिया से मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनती है, जिसे “सिंथेसिस गैस” या “सिंगैस” कहा जाता है। आगे इसे प्रोसेस कर सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG) तैयार की जाती है।

इस गैस का उपयोग एलपीजी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा इससे उर्वरक, मेथनॉल और अन्य रसायनों का उत्पादन भी संभव है। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा आयात पर होने वाला भारी खर्च कम होगा और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

भारत के पास कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। अनुमान के मुताबिक देश में करीब 4 बिलियन टन वार्षिक कोयला रिजर्व उपलब्ध है, जबकि सालाना खपत लगभग 1 बिलियन टन के आसपास है। ऐसे में अतिरिक्त कोयले का उपयोग गैसीफिकेशन के जरिए ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन में किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि इस योजना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में यह फैसला भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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