महारैली को संबोधित करते हुए खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही तय कराने की मांग से पीछे नहीं हटेगा। खरगे ने मंच से कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्तर पर लगातार उठाता रहेगा।
खरगे ने कहा कि रामलीला मैदान में जुटे लोगों का उद्देश्य केवल किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और दलितों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के कारण इन वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक योग्य नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
अपने संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खरगे ने कहा कि विपक्षी नेता इस तरह की कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहें।
खरगे ने अपने भाषण में महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन राज्यों की सरकारों पर निशाना साधते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में जनादेश को प्रभावित करने के लिए अनियमितताओं का सहारा लिया गया। हालांकि, ये आरोप विपक्ष की राजनीतिक दलीलों का हिस्सा हैं और संबंधित सरकारों तथा चुनाव आयोग का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है।
रैली के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपना राजनीतिक संदेश दोहराते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बिना लोकतंत्र की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना चाहिए। रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे। गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिंटो रोड से मार्च करते हुए रैली स्थल तक पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाई।
महारैली का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध रहा। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इसके अलावा चुनाव में पेपर बैलेट की वापसी का मुद्दा भी मंच से उठाया गया।
खरगे के भाषण ने इस रैली को चुनावी सुधारों की मांग के साथ-साथ केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के राजनीतिक अभियान से भी जोड़ दिया। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। अब इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि INDIA गठबंधन अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में क्या रणनीति अपनाता है।