रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में चुनाव के दौरान वोटों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों का जिक्र करते हुए मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक का उदाहरण दिया। राहुल ने कहा कि इन राज्यों के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी वोट चोरी की गई। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के लिए ईवीएम और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को समझाने के लिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद करीब 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि यह संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत बैठती है। राहुल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच वोट प्रतिशत के अंतर का हवाला देते हुए कहा कि दोनों के बीच करीब तीन प्रतिशत का अंतर था, जबकि इसके बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, 13.5 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से लगाया गया दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अवधि के आधिकारिक आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
राहुल ने इस पूरे मामले को सामान्य चुनावी विवाद मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह नागरिकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की भूमिका के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर उसका प्रभाव बढ़ गया है और संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों का दबाव है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को देशभर में उठाता रहेगा और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
रामलीला मैदान की इस रैली में विपक्षी गठबंधन INDIA के कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की जवाबदेही रहा। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग भी उठाई। वहीं, विपक्ष के इन आरोपों पर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है।
ऐसे में विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। फिलहाल राहुल गांधी के इस भाषण के बाद चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।