तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आज वोट चोरी करने वालों के खिलाफ महाभारत का आयोजन किया गया है। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब शकुनी अपना खेल खेलने में लगे हैं, तो लोकतंत्र की रक्षा के लिए कुरुक्षेत्र में उतरना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद जनसभा में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
RJD नेता ने आरोप लगाया कि देश में ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है, जहां यह तय करने की कोशिश हो रही है कि कौन व्यक्ति मतदान करेगा और किसे वोट देने के अधिकार से वंचित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और किसी भी नागरिक के इस अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। तेजस्वी के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने कहा कि देश की जनता देख रही है कि जिन संस्थाओं से निष्पक्षता और न्याय की उम्मीद की जाती है, उन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में जनता को अपेक्षित न्याय नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना देश के लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की हिम्मत न कर सके।
दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित महारैली का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए। गठबंधन के नेता इसे मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बता रहे हैं।
इस महारैली में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस समेत गठबंधन के अन्य घटक दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना संवैधानिक जिम्मेदारी है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित विवादों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटने नहीं देना चाहिए।
तेजस्वी यादव के भाषण को भी इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने महाभारत और कुरुक्षेत्र का उदाहरण देकर अपने समर्थकों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया। उनके बयान से साफ है कि RJD इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी है और इसे आने वाले समय में भी राजनीतिक रूप से उठाती रहेगी।
दिल्ली की इस महारैली के जरिए तेजस्वी यादव ने चुनावी पारदर्शिता, मतदान के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि विपक्ष के इन आरोपों और मांगों पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।