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दिल्ली में विपक्ष की महारैली, रोहतक में बीजेपी की पदयात्रा से गरमाई सियासत

दिल्ली और रोहतक में हुए दोनों आयोजनों ने यह साफ कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। विपक्ष जहां सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है, वहीं बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा बताकर जनता के बीच अपनी बात रख रही है।

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Gauravshali Bharat News
  • November 1, 2026 3:30 pm IST, Published 52 minutes ago
रोहतक: दिल्ली में विपक्षी दलों की महारैली और हरियाणा के रोहतक में बीजेपी की पदयात्रा ने एक नवंबर को देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। एक तरफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता रामलीला मैदान में जुटकर चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने रोहतक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत सड़क पर उतरकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। दोनों कार्यक्रमों के एक ही दिन आयोजित होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

हरियाणा के रोहतक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही। पदयात्रा के जरिए बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ ही प्रदेश में अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश की।

बीजेपी की यह पदयात्रा रोहतक स्थित छोटूराम पॉलिटेक्निक कॉलेज से शुरू होकर मॉडल टाउन के डी-पार्क तक निकाली गई। रास्ते में पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अभियान के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कार्यक्रम के समापन पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने का भी कार्यक्रम रखा गया। पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था के सम्मान को अभियान का प्रमुख आधार बताया।

बीजेपी का कहना है कि विपक्ष चुनावी राजनीति में अपनी स्थिति कमजोर होने के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह जनता के जनादेश को स्वीकार करने के बजाय राजनीतिक मुद्दों को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। बीजेपी ने अपने अभियान के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।

रोहतक में इस कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्र में आयोजित किया गया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यहां पहुंचकर पदयात्रा का नेतृत्व करना पार्टी की संगठनात्मक सक्रियता और हरियाणा में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के जरिए पार्टी ने स्थानीय स्तर पर संगठन की ताकत दिखाने का प्रयास किया।

दूसरी तरफ, देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने रामलीला मैदान में महारैली आयोजित की। विपक्षी दलों का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और चुनावी अनियमितताओं को लेकर उनकी आपत्तियां रहीं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल हैं और चुनाव आयोग को इनका जवाब देना चाहिए।

दिल्ली और रोहतक में हुए दोनों आयोजनों ने यह साफ कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। विपक्ष जहां सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है, वहीं बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा बताकर जनता के बीच अपनी बात रख रही है।

दिल्ली की महारैली और रोहतक की पदयात्रा के जरिए दोनों राजनीतिक खेमों ने अपने-अपने समर्थकों को एकजुट करने और जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की। अब देखना होगा कि इन आयोजनों का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है और लोकतंत्र तथा चुनावी पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस आगे क्या नया मोड़ लेती है।

 

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