नई दिल्ली: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और दक्षिण कोरिया के गृह एवं सुरक्षा मंत्री युन होजुंग के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में डिजिटल गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस, लोक प्रशासन, क्षमता निर्माण और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में पारदर्शी, प्रभावी और तकनीक आधारित शासन व्यवस्था समय की आवश्यकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सुशासन के साझा सिद्धांतों से जुड़े हुए हैं तथा दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
वार्ता में भारत की डिजिटल उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। केंद्र सरकार द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं को लेकर भारत के अनुभव साझा किए गए। वहीं दक्षिण कोरिया ने स्मार्ट गवर्नेंस, डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा किया।
दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सरकारी कार्यों में उपयोग, सिविल सेवकों के प्रशिक्षण, नागरिक भागीदारी बढ़ाने और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। इसके साथ ही लोक प्रशासन और सरकारी नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप देने की दिशा में चल रही चर्चाओं पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत और दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल रणनीतिक और आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर भी मजबूत हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और कोरियाई राजा किम सूरो से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित किया।
बैठक में व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, फिनटेक, समुद्री सहयोग, संस्कृति और खेल जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थागत सहयोग, तकनीकी साझेदारी और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत किया जाना चाहिए।
वार्ता का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जहां दोनों देशों ने नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।