नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के साथ उसका विकास सहयोग कार्यक्रम आपसी विश्वास, साझेदारी और सहमति के आधार पर आगे बढ़ता रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच चल रही विकास परियोजनाएं पारस्परिक संवाद और सहमति से संचालित होती हैं तथा भविष्य में भी यही व्यवस्था जारी रहेगी।
विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बांग्लादेश में भारत द्वारा समर्थित विकास परियोजनाओं से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच विकास सहयोग दोनों देशों के साझा हितों और पारस्परिक समझ पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं किसी एकतरफा निर्णय का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि दोनों सरकारों के बीच लगातार संवाद और सहमति के बाद आगे बढ़ाई जाती हैं।
भारत और बांग्लादेश के संबंध हाल के वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक क्षेत्रों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच संपर्क, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।
भारत लंबे समय से बांग्लादेश में बुनियादी ढांचा विकास, रेल और सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, जल संसाधन प्रबंधन तथा सामाजिक विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। इन परियोजनाओं को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
रणधीर जायसवाल के बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब क्षेत्रीय सहयोग और पड़ोसी देशों के साथ भारत की विकास साझेदारी पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के तहत बांग्लादेश को प्रमुख साझेदारों में शामिल किया जाता है और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद भी जारी रहता है।
विकास सहयोग केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास, स्थिरता और दीर्घकालिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। भारत का जोर हमेशा इस बात पर रहा है कि पड़ोसी देशों के साथ विकास संबंधी पहल उनकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाई जाए। विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से भारत बांग्लादेश के साथ अपने विकास सहयोग कार्यक्रम को पहले की तरह पारस्परिक सम्मान और सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने के पक्ष में है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और द्विपक्षीय संबंधों को भविष्य में भी मजबूती मिलने की उम्मीद है |