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हिंद-प्रशांत में नई ताकत बने भारत-जापान,PM मोदी बोले-ताकाइची मेरी छोटी बहन

नई दिल्ली: भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्थिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 2, 2026 3:06 pm IST, Published 31 minutes ago

नई दिल्ली: भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्थिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की मौजूदगी में इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक सुरक्षा और नई तकनीकों के विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को  मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल नवाचार में सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया।

संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के अस्थिर वैश्विक माहौल में देशों के बीच सबसे बड़ी ताकत आपसी विश्वास है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता इसी भरोसे, सम्मान और साझा मूल्यों पर आधारित है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों में जापान ने भारत के औद्योगिक विकास, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है।

इस मुलाकात का सबसे भावनात्मक पल तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को अपनी “छोटी बहन” बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों की आत्मीयता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत-जापान संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि विश्वास और वर्षों पुरानी मित्रता का प्रतीक हैं।   ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं, भारत और जापान की यह नई पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन, आर्थिक विकास और तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

 

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