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‘वंदे मातरम्’ का अपमान पड़ा भारी! सरकार ला रही सख्त कानूनी प्रावधान

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार राष्ट्रीय गौरव से जुड़े कानूनों में अहम बदलाव का प्रस्ताव रखने जा रही है। सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के लिए एक विधेयक सूचीबद्ध किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में जानबूझकर […]

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  • July 17, 2026 4:25 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार राष्ट्रीय गौरव से जुड़े कानूनों में अहम बदलाव का प्रस्ताव रखने जा रही है। सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के लिए एक विधेयक सूचीबद्ध किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव है।

संसदीय कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक को सबसे पहले राज्यसभा में पेश कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानूनी प्रावधानों को और स्पष्ट एवं प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करता है, उसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करता है या सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उसके गायन को रोकने अथवा बाधित करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

प्रस्ताव में ऐसे मामलों के लिए कारावास का प्रावधान भी शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि अंतिम स्वरूप संसद में चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। सरकार का तर्क है कि जिस प्रकार राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के सम्मान के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है, उसी प्रकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान को भी कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए। यदि संसद से यह विधेयक पारित हो जाता है, तो राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में स्पष्ट कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार होगा।

संसदीय सूत्रों के अनुसार सरकार को भरोसा है कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त समर्थन उपलब्ध है। बताया जा रहा है कि सरकार विभिन्न दलों से भी संवाद बनाए हुए है ताकि विधेयकों पर व्यापक सहमति बनाई जा सके। हालांकि इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और संसद में होने वाली बहस भी महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े विषय अक्सर राजनीतिक और संवैधानिक विमर्श का हिस्सा बनते हैं।

मानसून सत्र की कार्यसूची में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill) को भी चर्चा और पारित कराने के लिए शामिल किया गया है। यह विधेयक पहले बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन उस समय उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था। सरकार अब मानसून सत्र में इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में आगामी सत्र के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और विदेशी चंदे से जुड़े कानूनों पर संसद में व्यापक चर्चा देखने को मिल सकती है।

 

 

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