नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को बलपूर्वक नियंत्रित करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं है।
कन्हैया कुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को निशाने पर लेते हुए कहा कि जंतर-मंतर जैसे सार्वजनिक प्रदर्शन स्थल से आंदोलनकारियों को हटाने की कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाजों को सुनने के बजाय उन्हें दबाने की नीति अपना रही है।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। उनका आरोप था कि विरोध करने वालों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सरकार अपने विरोधियों के साथ अलग रवैया अपनाती है। हालांकि यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है और इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कन्हैया कुमार ने कहा कि युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही की मांग आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखेंगे।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से कथित तौर पर पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सकीय निगरानी के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में उनका उपचार जारी है। इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं। वहीं सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और देश की राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार इस पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।