कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ‘एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026’ के तहत महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य सदस्यों को रिटायरमेंट सेविंग्स में अधिक लचीलापन प्रदान करना है। नई व्यवस्था के अनुसार, कानूनी वेतन सीमा यानी 15,000 रुपये प्रति माह तक 12% योगदान अनिवार्य है, जबकि इससे अधिक वेतन होने पर कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान दे सकते हैं। हालांकि, नियोक्ता (एम्प्लॉयर) के लिए इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान में समान हिस्सेदारी देना अनिवार्य नहीं है और इसे किसी भी समय कम या बंद किया जा सकता है।
पैसे निकालने की प्रक्रिया को पहले से काफी आसान बना दिया गया है, जिसमें निकासी की श्रेणियों को 13 से घटाकर अब केवल 3 कर दिया गया है। इन श्रेणियों में घर से जुड़ी जरूरतें, विशेष परिस्थितियां और अनिवार्य आवश्यकताएं जैसे कि बीमारी, शिक्षा या शादी शामिल हैं। इसके अलावा, सदस्य अपने एलिजिबल पीएफ बैलेंस का 100% तक एडवांस निकाल सकेंगे, बशर्ते उन्हें अपने अकाउंट में कुल योगदान का 25% हिस्सा मिनिमम बैलेंस के रूप में बनाए रखना होगा।
नई स्कीम में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘प्रिंसिपल एम्प्लॉयर’ की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। यदि कॉन्ट्रैक्टर अलग से रजिस्टर्ड नहीं है, तो उन कर्मचारियों के पीएफ योगदान को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियोक्ताओं को अब स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर फॉर्म ‘V’ में कंबाइंड रिटर्न फाइल करना होगा, जिसमें कर्मचारी का [Aadhaar Redacted], पैन, यूएएन, ग्रॉस वेज और ईपीएफ वेज जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देना अनिवार्य होगा। ये सभी बदलाव सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की सहमति से और नए लेबर कोड्स के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।