देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत तय समय पर होने के संकेत मिल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून के 20 मई के आसपास अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पहुंचने की सबसे अधिक संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि 14 से 20 मई के बीच दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और द्वीप समूह के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मई के तीसरे सप्ताह में दक्षिण-पश्चिमी हवाएं मजबूत होंगी। बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के आसपास निचले और मध्य क्षोभमंडलीय स्तर पर इन हवाओं की रफ्तार बढ़ने से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसका असर दक्षिण भारत में व्यापक बारिश के रूप में दिखाई देगा।
IMD ने अनुमान जताया है कि 14 से 20 मई के दौरान केरल, तमिलनाडु और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी। कई इलाकों में भारी और बहुत भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है। फिलहाल दक्षिण भारत के कई राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हैं और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी है।
हालांकि, इस बार मानसून पर अल नीनो का असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने अप्रैल में जारी अपने पूर्वानुमान में कहा था कि 2026 में देशभर में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। विभाग के अनुसार, पूरे सीजन में वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
जलवायु पैटर्न के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तौर पर मई के तीसरे सप्ताह में अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार क्षेत्र में प्रवेश करता है। इसके बाद यह धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए जून की शुरुआत तक केरल तट पर पहुंचता है।