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निर्जला एकादशी 2026: सबसे कठिन व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?

भूलकर भी न करें ये गलतियां नई दिल्ली : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है। इसे निर्जला एकादशी, भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग साल की सभी […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 25, 2026 10:28 am IST, Published 1 hour ago

भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है। इसे निर्जला एकादशी, भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, वे केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर पूरे साल भर का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

चूंकि यह व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है, इसलिए इसके नियम बेहद कठोर हैं। आइए जानते हैं कि इस व्रत के दौरान किन चीजों का परहेज करना चाहिए और व्रत खोलने (पारणा) के समय या विशेष परिस्थितियों में क्या खाना-पीना चाहिए।

### भूलकर भी न खाएं ये चीजें (क्या न खाएं):

  • अन्न और अनाज: निर्जला एकादशी के दिन गेहूं, चावल, दाल, मक्का या किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

  • चावल (विशेष निषेध): शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ा दोष माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दिन शरीर में जल तत्व को नियंत्रित रखने के लिए चावल से दूरी बनाई जाती है।

  • लहसुन और प्याज: इस दिन घर में तामसिक भोजन बिल्कुल नहीं बनना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा या भारी मसालों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।

  • सब्जियों में परहेज: एकादशी पर बैंगन, सेम (सेमी) और गोभी जैसी सब्जियों का सेवन अशुभ माना जाता है।

  • नमक: व्रत के दौरान साधारण सफेद नमक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

### विशेष परिस्थिति या पारणा के समय क्या खाएं:

निर्जला एकादशी का मूल नियम सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक बिना पानी और अन्न के रहना है। लेकिन जो लोग बीमार हैं, बुजुर्ग हैं या गर्भवती महिलाएं हैं, वे फलाहार का पालन कर सकते हैं। इसके अलावा अगले दिन व्रत खोलते समय इन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए:

  • ताजे फल: सेब, केला, अनार और मौसमी फलों का सेवन किया जा सकता है।

  • डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही, मखाना खीर (बिना साधारण नमक के) और छाछ ली जा सकती है।

  • सूखे मेवे (Dry Fruits): काजू, बादाम, किशमिश और अखरोट ऊर्जा बनाए रखने के लिए खाए जा सकते हैं।

  • कुट्टू या सिंघाड़े का आटा: अगर स्वास्थ्य ठीक न हो और फलाहार करना पड़े, तो सेंधा नमक के साथ कुट्टू, सिंघाड़े या साबूदाने की डिश बनाई जा सकती है।

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