री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर भारी साइबर अटैक
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गहराते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया है। इसके साथ ही, विवादित डिजिटल मूल्यांकन और टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
प्रशासनिक फेरबदल के तहत सीनियर आईएएस ऑफिसर लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है।
इस पूरे मामले का पर्दाफाश करने वाले झारखंड (रांची) के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत आज दोपहर 1 बजे संसद की स्थायी समिति (शिक्षा) के समक्ष पेश हुए। भारतीय संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी छात्र को किसी नीति या व्यवस्था की कमियों पर अपनी बात रखने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
सार्थक ने समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह और अन्य सदस्यों के सामने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
15 गंभीर खामियों का दावा: सार्थक ने अपने ब्लॉग और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कुल 15 अनियमितताओं को उजागर किया।
नियम बदलने के आरोप: छात्र का आरोप है कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ (Coempt EduTeck) नामक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) के नियमों में बदलाव किए गए। टेंडर से ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय टर्नओवर और खराब परफॉर्मेंस से जुड़े कड़े क्लॉज हटा दिए गए ताकि यह कंपनी क्वालिफाई कर सके।
विवादित बैकग्राउंड: सार्थक ने बताया कि यह कंपनी पहले ‘ग्लोबारेना’ (Globarena) नाम से काम करती थी, जो 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन विवाद में भी घिरी थी।
संसदीय समिति का रुख: समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि सार्थक की बातों को बेहद गंभीरता से सुना गया है और अब बोर्ड के जवाबों के साथ इन मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। इस बीच, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सार्थक से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया है।
एक तरफ जहां यह राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ आज ही शुरू हुए सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ।
सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पोर्टल खुलते ही दुर्भावनापूर्ण तत्वों (Malicious Actors) ने सिस्टम को ठप करने की कोशिश की। महज 2 मिनट के भीतर 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट (हिट्स) दर्ज किए गए। इसके अलावा, 1 लाख से ज्यादा बार अनधिकृत तरीके से सिस्टम की गोपनीय फाइलों तक पहुंचने का प्रयास किया गया।
राहत की बात: इस भारी साइबर अटैक (DDoS) के बावजूद सीबीएसई के मजबूत फायरवॉल और सुरक्षा तंत्र ने पोर्टल को क्रैश होने से बचा लिया। सुरक्षात्मक रुकावटों के बाद भी पोर्टल सुचारू रूप से काम करता रहा और दोपहर 3 बजे तक 16,000 से अधिक प्रभावित छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए सफलतापूर्वक आवेदन कर दिया।
सीबीएसई ने 13 मई को कक्षा 12वीं का परिणाम घोषित किया था। इस साल बोर्ड ने पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पूरी तरह से कंप्यूटर स्क्रीन आधारित ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सर्विस को लागू किया था। रिजल्ट आने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने बड़े पैमाने पर शिकायतें दर्ज कराईं। छात्रों का आरोप था कि उन्हें धुंधली (Blurred) स्कैन कॉपियां मिलीं, कई कॉपियों के पन्ने गायब थे और कुछ मामलों में तो दूसरे छात्रों की आंसर-शीट अटैच हो गई थी। इसके बाद से ही इस पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और इसके कॉन्ट्रैक्ट पर सवाल उठ रहे थे।