नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 से 17 जुलाई 2026 तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह एक उच्चस्तरीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है।
इस प्रतिनिधिमंडल में भारत की कई प्रमुख कंपनियां शामिल होंगी, जो उन्नत विनिर्माण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण, डिजाइन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। सरकार का मानना है कि यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्पेन यात्रा के दौरान पीयूष गोयल वहां के वरिष्ठ मंत्रियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। भारत-स्पेन बिजनेस राउंडटेबल में दोनों देशों की कंपनियां ऑटोमोबाइल, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगी। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से मिलने वाले अवसर भी बैठक का प्रमुख विषय रहेंगे। इसके बाद बेल्जियम में मंत्री एंटवर्प पोर्ट और एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा करेंगे। यहां लॉजिस्टिक्स, ग्रीन सप्लाई चेन, हीरा कारोबार, जिम्मेदार सोर्सिंग और वैश्विक व्यापार तंत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा भारत-ईयू बिजनेस राउंडटेबल और भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी वह भाग लेंगे, जहां व्यापार सुगमता, डिजिटल सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और नई तकनीकों पर विचार-विमर्श होगा। फिनलैंड दौरे के दौरान पीयूष गोयल वहां की सरकार, उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थानों के साथ बैठक करेंगे। इस चरण में 6G तकनीक, दूरसंचार, स्मार्ट मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक अनुसंधान और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और बिजनेस फिनलैंड के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय हैं। ऐसे में यह दौरा निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ भारत को विश्वसनीय आर्थिक साझेदार के रूप में और मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।