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उम्रकैद के बीच मेडिकल राहत की मांग, आसाराम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय

नई दिल्ली: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम ने एक बार फिर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की है। 90 वर्षीय आसाराम की ओर से दाखिल मेडिकल बेल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करते हुए […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 2:13 pm IST, Published 60 minutes ago

नई दिल्ली: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम ने एक बार फिर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की है। 90 वर्षीय आसाराम की ओर से दाखिल मेडिकल बेल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करते हुए 17 जुलाई की तारीख तय की है। अब इस दिन अदालत यह विचार करेगी कि मौजूदा स्वास्थ्य परिस्थितियों में उन्हें राहत दी जा सकती है या नहीं।

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 8 जुलाई को उन्हें अचानक आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में जोधपुर स्थित एम्स में भर्ती कराना पड़ा। वकील के अनुसार डॉक्टरों ने उन्हें उच्च जोखिम वाला मरीज माना और इलाज के दौरान रक्त भी चढ़ाना पड़ा। इसी आधार पर अदालत से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केवल याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने अभी जमानत पर कोई टिप्पणी या राहत नहीं दी है। मामले की मेरिट पर फैसला 17 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही लिया जाएगा।

आसाराम पहले भी स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अस्थायी राहत प्राप्त कर चुके हैं। इलाज पूरा होने के बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया था। इस बार भी उनकी याचिका पूरी तरह चिकित्सा संबंधी परिस्थितियों पर आधारित है। बचाव पक्ष का कहना है कि बढ़ती उम्र और गंभीर बीमारियों को देखते हुए उन्हें चिकित्सा आधार पर राहत मिलनी चाहिए।

यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुए उस चर्चित प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार पीड़िता को राजस्थान के जोधपुर के निकट स्थित आश्रम में बुलाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। शिकायत दर्ज होने के बाद राजस्थान पुलिस ने अगस्त 2013 में आसाराम को गिरफ्तार किया था।

लंबी सुनवाई के बाद जोधपुर की विशेष अदालत ने अप्रैल 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें दुष्कर्म और पॉक्सो कानून के तहत दोषी माना। बाद में इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने कुछ धाराओं में राहत दी, लेकिन दुष्कर्म से संबंधित दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

इसके बाद आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जून 2026 में उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के साथ-साथ अपनी खराब सेहत, हृदय संबंधी समस्याओं और हालिया इंटरनल ब्लीडिंग का हवाला देते हुए चिकित्सा आधार पर जमानत की मांग की। अब सभी की नजर 17 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि प्रस्तुत चिकित्सा दस्तावेज और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां अंतरिम जमानत देने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

 

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