बैठक के दौरान ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर विस्तार से चर्चा हुई। ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई, वैश्विक व्यापार और निवेश पर संभावित प्रभावों का भी आकलन किया गया।
इसके साथ ही भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने के लिए विभिन्न नीतिगत उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों और परिषद के सदस्यों ने निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए ईज ऑफ लिविंग (Ease of Living) तथा उद्योग और कारोबार के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को और बेहतर बनाने संबंधी कदमों पर भी चर्चा की गई। सरकार का जोर ऐसी नीतियों पर है जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेशकों का विश्वास मजबूत करें।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर और गतिशील बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित रणनीति पर काम किया जा रहा है।