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ग्रेट निकोबार दौरे पर राहुल गांधी का हमला, बोले— ‘विकास नहीं, विनाश’

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप के अपने हालिया दौरे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने इस दौरे का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जिस परियोजना को सरकार विकास के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वह वास्तव में पर्यावरण और स्थानीय समुदायों […]

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  • April 29, 2026 3:20 pm IST, Published 2 days ago

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप के अपने हालिया दौरे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने इस दौरे का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जिस परियोजना को सरकार विकास के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वह वास्तव में पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है।

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ग्रेट निकोबार के घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र बेहद अनमोल है और यहां के पेड़-पौधे कई पीढ़ियों से विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि देश की प्राकृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विकास परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की योजना बनाई जा रही है, जिससे लगभग 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के वर्षावन पर खतरा मंडरा रहा है। उनके अनुसार, यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि यहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन और संस्कृति पर भी गहरा असर डाल सकता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनकी जमीन तथा अधिकारों पर खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे केवल एक परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी विचार किया जाना जरूरी है।

अपने दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कैंपबेल बे क्षेत्र में स्थित श्री सिंह सभा गुरुद्वारा में भी पहुंचकर मत्था टेका और लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं और चिंताओं को समझने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार में जो कुछ हो रहा है, वह देश की प्राकृतिक संपदा और आदिवासी विरासत के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे को समझें और इसके संरक्षण के लिए आवाज उठाएं।

फिलहाल, इस परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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