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राम मंदिर मामले में याचिकाकर्ता को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई नहीं दी मंजूरी

नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले में दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की थी और आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने की […]

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  • June 25, 2026 11:16 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले में दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की थी और आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने की अपील की थी।

याचिका में दावा किया गया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं की आशंका है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसके लिए संबंधित एजेंसियों को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि मामले से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए आरोपों की सत्यता सामने लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जब मामले का उल्लेख किया गया, तब याचिकाकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया। हालांकि अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और कहा कि याचिका को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत के इस रुख के बाद अब मामले की सुनवाई नियमित सूची के अनुसार होने की संभावना है।

मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी प्रकार के आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि तथ्यों की स्पष्टता सामने आ सके। वहीं दूसरी ओर, कुछ पक्षों का कहना है कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों के लगाए गए आरोपों से धार्मिक संस्थानों की छवि प्रभावित हो सकती है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की गहन जांच जरूरी है।

कानून के जानकारों का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने और जांच के आदेश से जुड़े मामलों में अदालतें आमतौर पर उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और प्रारंभिक साक्ष्यों का परीक्षण करती हैं। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह संबंधित एजेंसियों को उचित निर्देश दे सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर ही लिया जाता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद मामला नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि याचिका पर अगली सुनवाई कब होती है और अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।

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