नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रथम परिवार ने कई पीढ़ियों तक लोकतंत्र की बात करते हुए राजतंत्र जैसी व्यवस्था चलाई और अब उसके नेता आकाशवाणी परिसर में घुसने का प्रयास कर रहे हैं।
सुधांशु त्रिवेदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने दिल्ली में संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग तक पहुंचना चाहते थे। पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया, जिसके बाद कई विपक्षी नेता सड़क पर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दलों के सांसद शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR को लेकर अपनी आपत्तियां जताईं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
मार्च को रोकने के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच काफी देर तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। कई सांसद बैरिकेड के पास पहुंच गए। राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ते हुए भी नजर आए। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कुछ नेता आकाशवाणी भवन के परिसर की ओर बढ़े। घटनाक्रम के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
इसी घटनाक्रम को लेकर सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लेकर परिवारवाद और सत्ता के केंद्रीकरण का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जो लोग लंबे समय से लोकतंत्र की बात करते रहे हैं, वही आज सरकारी परिसर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं। त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और मौजूदा प्रदर्शन के बीच तुलना करते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता के बयान में खास तौर पर आकाशवाणी भवन का जिक्र महत्वपूर्ण रहा। दरअसल, चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने आकाशवाणी भवन के आसपास रोका था। इसके बाद कुछ विपक्षी नेता वहीं विरोध में बैठ गए, जबकि बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी परिसर के गेट तक पहुंच गए। इस दौरान प्रदर्शन और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
विपक्ष की ओर से इस पूरे विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग पर निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे रोकने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, भाजपा विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रही है। सत्ता पक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष को संस्थागत प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर उसके राजनीतिक उद्देश्य पर भी सवाल उठाए हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते अविश्वास को केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष SIR और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सड़क पर आंदोलन कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर उसके राजनीतिक इतिहास और नेतृत्व पर सवाल उठा रही है। दिल्ली में मंगलवार का घटनाक्रम इस राजनीतिक टकराव को और तेज करता दिखाई दिया है।