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सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में बाहरी प्रवेश प्रतिबंध पर सुनवाई ठुकराई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से दायर याचिका […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 3, 2026 1:12 pm IST, Published 27 minutes ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं।

याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इस निर्देश के तहत सरकारी स्कूल परिसरों में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य से पहले अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा स्कूल परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी पूर्व लिखित अनुमति की व्यवस्था की गई है।

याचिका में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में 19 अगस्त को जारी एक आदेश का भी हवाला दिया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी इस आदेश में बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना परिषद के स्कूलों में प्रवेश करने या वहां फोटो और वीडियो बनाने से रोकने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा सहित अन्य जिले शामिल बताए गए हैं। याचिका में इन निर्देशों को मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए अदालत के समक्ष चुनौती दी गई थी।

यह याचिका काकरोच जनता पार्टी की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की पृष्ठभूमि में दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकारी स्कूलों की स्थिति से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक हित में रिकॉर्ड करना और उसे लोगों तक पहुंचाना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया कि स्कूलों जैसे सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी जानकारी के प्रसार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A के तहत मिले अधिकारों का हवाला देते हुए इन प्रतिबंधों को चुनौती दी थी। दलील में कहा गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत वैध पत्रकारिता और सार्वजनिक संस्थानों से संबंधित सूचनाओं को सामने लाने का अधिकार भी शामिल है।

हालांकि, याचिका में बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी स्वीकार किया गया था। इसमें कहा गया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए उचित नियमों और सार्वजनिक संस्थानों की पारदर्शिता के बीच संतुलन जरूरी है।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जारी किए गए निर्देशों के पीछे स्कूल परिसरों में अनधिकृत गतिविधियों को नियंत्रित करना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है। वहीं, याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि क्या ऐसे नियम सार्वजनिक संस्थानों की जानकारी जुटाने और उसे साझा करने की गतिविधियों पर व्यापक रोक लगा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस याचिका पर अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद संबंधित प्रतिबंधों को लेकर दायर यह याचिका फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी। अदालत ने इस मामले में दिए गए निर्देशों की संवैधानिक वैधता पर कोई विस्तृत फैसला सुनाए बिना याचिका पर विचार करने से इनकार किया।

 

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