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सुप्रीम कोर्ट की CBSE से सख्त टिप्पणी

कहा- डिजिटल मार्किंग सिस्टम से छात्र हो रहे निराश नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के कारण छात्रों में निराशा बढ़ रही है और इस समस्या […]

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  • July 15, 2026 5:51 pm IST, Published 26 minutes ago

कहा- डिजिटल मार्किंग सिस्टम से छात्र हो रहे निराश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के कारण छात्रों में निराशा बढ़ रही है और इस समस्या का समाधान आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य सरकार या CBSE के साथ किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि छात्रों की परेशानियों का समाधान सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने CBSE से पूछा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही केंद्र सरकार से भी इस प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम?

CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम एक डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था है, जिसमें बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा जाता है। इस प्रणाली में परीक्षक कागज की कॉपी के बजाय डिजिटल स्क्रीन पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं।

केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि:

  • जिन छात्रों की मार्कशीट में गड़बड़ी की शिकायतें थीं, उनमें से अधिकांश मामलों का समाधान किया जा चुका है।
  • सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।
  • मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।
  • आयोग OSM प्रणाली की कमियों की जांच करेगा और सुधार संबंधी सुझाव देगा।
  • सरकार इस मामले को टकराव की तरह नहीं, बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देख रही है।

याचिका में क्या मांग की गई?

यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि:

  • OSM मूल्यांकन प्रणाली के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियमावली बनाई जाए।
  • इसकी निगरानी और सुधार के लिए एक हाई-पावर कमेटी गठित की जाए।
  • जिन छात्रों को पहले से प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें न्यूनतम अंकों की शर्त में राहत दी जाए।
  • विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता में भी आवश्यक छूट दी जाए।

छात्रों की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से असंतुष्ट हैं और उनकी शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों का बोर्ड परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बना रहे।

अब इस मामले में CBSE द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों और सरकार की रिपोर्ट पर अगली सुनवाई के दौरान अदालत आगे का फैसला करेगी।

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