नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत पूरी जांच और सत्यापन के बाद जारी किया जाता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा के लिए पासपोर्ट जारी करती है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश की कुल आबादी में 8 प्रतिशत से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है।
इससे पहले 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर भी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। यह स्पष्टीकरण चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर उठे सवालों के बाद दिया गया था।
मंत्रालय ने अपने पक्ष में 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट को भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत विशेष परिस्थितियों और जनहित में केंद्र सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसी कारण केवल पासपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं की जा सकती।
सरकार के इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता का अंतिम प्रमाण कौन-सा दस्तावेज है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह के बयानों के जरिए भविष्य में नागरिकता से जुड़े विवादों की जमीन तैयार कर रही है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि पासपोर्ट का उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पहचान और अनुमति प्रदान करना है, न कि नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण देना।