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भाजपा-कांग्रेस समेत 68 राजनीतिक दलों का नया संविधान चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं

नौ महीने बाद भी आदेश अधूरा पारदर्शिता के लिए चुनाव आयोग ने जारी किया था निर्देश, 73 मान्यता प्राप्त दलों में से केवल पांच ने ही अपडेट किए अपने दस्तावेज नई दिल्ली, 5 नवंबर। देश की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव आयोग के निर्देश […]

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  • November 5, 2026 10:01 am IST, Published 47 seconds ago

नौ महीने बाद भी आदेश अधूरा

पारदर्शिता के लिए चुनाव आयोग ने जारी किया था निर्देश, 73 मान्यता प्राप्त दलों में से केवल पांच ने ही अपडेट किए अपने दस्तावेज

नई दिल्ली, 5 नवंबर। देश की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव आयोग के निर्देश के करीब नौ महीने बाद भी देश के 68 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने अपना संशोधित संविधान सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के संगठनात्मक कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 8 दिसंबर 2025 को सभी मान्यता प्राप्त दलों को अपने संविधान और नियमों में किए गए संशोधनों की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 73 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से केवल पांच दलों ने ही आयोग के निर्देश के बाद अपने नए दस्तावेज रिकॉर्ड में दर्ज कराए हैं। इनमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, बीजू जनता दल, रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी, वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी और भारत आदिवासी पार्टी शामिल हैं। शेष 68 दलों के दस्तावेजों को लेकर अद्यतन जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।

छह राष्ट्रीय दलों के दस्तावेज भी नहीं हुए अपडेट

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि देश के छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में से किसी का भी संविधान चुनाव आयोग के निर्देश के बाद नई तारीख के साथ सार्वजनिक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देता। इन दलों में भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी शामिल हैं।

इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संविधान पर जुलाई 2022 और शिवसेना के दस्तावेज पर मई 2022 की तारीख दर्ज है। इससे राजनीतिक दलों के संगठनात्मक दस्तावेजों को नियमित रूप से अद्यतन रखने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

निर्देश से पहले कुछ दलों ने किए थे बदलाव

सार्वजनिक रिकॉर्ड में कुछ राजनीतिक दलों के दस्तावेज 8 दिसंबर 2025 के निर्देश से पहले ही अपलोड किए गए थे। जननायक जनता पार्टी का संविधान 24 नवंबर 2025 को दर्ज हुआ था। वहीं भारत राष्ट्र समिति का दस्तावेज 15 सितंबर 2025, बहुजन समाज पार्टी का 1 सितंबर 2025 तथा विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची और जनसेना पार्टी के दस्तावेज 31 जुलाई 2025 को वेबसाइट पर दर्ज हुए थे।

समाजवादी पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के संविधान संबंधी दस्तावेज भी जून 2025 में सार्वजनिक किए गए थे। हालांकि, ये सभी बदलाव चुनाव आयोग के दिसंबर 2025 के निर्देश से पहले के हैं।

संगठनात्मक चुनाव और पारदर्शिता पर भी सवाल

राजनीतिक दलों के संविधान में उनके संगठन की संरचना, पदाधिकारियों की नियुक्ति, आंतरिक चुनाव, सदस्यता प्रक्रिया और निर्णय लेने के अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण नियम होते हैं। इन दस्तावेजों का समय-समय पर अद्यतन होना जरूरी है, ताकि पार्टी के आंतरिक कामकाज और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सके।

इस मामले में सार्वजनिक रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान केवल दस्तावेजों की तारीख ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक चुनावों की अवधि को लेकर भी अंतर सामने आया है। इससे यह सवाल उठता है कि राजनीतिक दल अपने आंतरिक लोकतंत्र और संगठनात्मक जवाबदेही को किस तरह सुनिश्चित कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों की जवाबदेही भी जरूरी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की भूमिका केवल चुनाव लड़ने और सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने संगठन के भीतर भी लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन करें। जब राजनीतिक दल देश में पारदर्शी शासन और जवाबदेह व्यवस्था की बात करते हैं, तो उनके अपने संगठनात्मक दस्तावेजों का सार्वजनिक और अद्यतन होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद अधिकांश दलों के नए संविधान सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने से व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस स्थिति पर आगे क्या कदम उठाता है और राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक दस्तावेजों को सार्वजनिक रूप से अद्यतन करने के लिए कब तक पहल करते हैं।

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