दिल्ली की हवा हुई और जहरीली

शुक्रवार तक गंभीर श्रेणी में जाने का खतरा, पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़कर 16.2 फीसदी हुई नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 से बढ़कर 377 पर पहुंच गया। इसके साथ ही राजधानी की हवा बहुत खराब […]

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  • November 5, 2026 9:23 am IST, Published 42 minutes ago

शुक्रवार तक गंभीर श्रेणी में जाने का खतरा, पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़कर 16.2 फीसदी हुई

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 से बढ़कर 377 पर पहुंच गया। इसके साथ ही राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई। मौसम और प्रदूषण निगरानी एजेंसियों ने आशंका जताई है कि शुक्रवार तक वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है। अनुमान है कि अगले करीब छह दिनों तक प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना कम है।

प्रदूषण बढ़ने के पीछे स्थानीय स्रोतों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों में जल रही पराली का धुआं भी बड़ी वजह बन रहा है। बुधवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में बाहरी स्रोतों की हिस्सेदारी 69 प्रतिशत रही, जबकि स्थानीय कारणों का योगदान 31 प्रतिशत दर्ज किया गया।

पराली के धुएं ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता

दिल्ली की हवा में पराली के धुएं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। मंगलवार को प्रदूषण में पराली का योगदान 8.2 प्रतिशत था, जो बुधवार को बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुमान के मुताबिक, शुक्रवार तक पराली के धुएं की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

यदि ऐसा होता है तो पराली का धुआं वाहनों से निकलने वाले धुएं से भी अधिक प्रदूषणकारी स्रोत बन सकता है। इससे राजधानी में पहले से खराब वायु गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका है।

पंजाब के पांच जिलों को कारण बताओ नोटिस

पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पंजाब के पांच जिलों के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें बरनाला, बठिंडा, फाजिल्का, जालंधर और फरीदकोट शामिल हैं।

इन जिलों के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर जवाब मांगा गया है। इससे पहले मंगलवार को गुरदासपुर और कपूरथला के अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए थे।

दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार

राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। बुधवार को विभिन्न निगरानी केंद्रों पर दर्ज एक्यूआई के आंकड़े इस प्रकार रहे:

इलाका एक्यूआई
आईआईटी दिल्ली 455
जहांगीरपुरी 449
पंजाबी बाग 446
मुंडका 439
विवेक विहार 436
रोहिणी 432
नरेला 429
अलीपुर 429
सोनिया विहार 427
आईटीओ 411

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली के कई हिस्सों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है।

वाहनों का धुआं भी बना बड़ी समस्या

पर्यावरण विशेषज्ञ अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली में प्रदूषण का एक प्रमुख स्थानीय कारण बना हुआ है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में पराली जलाने से निकलने वाले धुएं ने स्थिति को और खराब कर दिया है।

इसके अलावा हवा में नमी अधिक होने और हवा की गति कम रहने से प्रदूषक तत्व वातावरण में फैल नहीं पा रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रदूषण जमीन के आसपास जमा हो रहा है और लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदूषण रोकने के लिए सरकार के कदम भी बेअसर

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एक नवंबर से विशेष योजना लागू की है। इसके तहत 31 जनवरी तक निजी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई है, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा।

वहीं, दूसरे चरण की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को राजधानी का आसमान धुंध की मोटी परत से ढका रहा। गुरुवार सुबह भी हल्की धुंध और कोहरा देखने को मिला। बुधवार को अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा

बढ़ता प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मौसम में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। सुबह और देर शाम खुले स्थानों पर व्यायाम करने से भी परहेज करना बेहतर है।

दिल्ली के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर साल सर्दियों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक क्यों हो जाता है? जब स्थानीय और बाहरी दोनों स्रोतों की पहचान हो चुकी है, तो स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे? केवल प्रतिबंध और चेतावनी पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के लिए मिलकर ठोस और दीर्घकालिक रणनीति बनाना जरूरी है।

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