पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी खींचतान अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचती नजर आ रही है। पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी और सांसदों के अलग रुख अपनाने की अटकलों ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसद पार्टी लाइन से असहमति जता सकते हैं, जिसके बाद संगठन में संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थिति को संभालने के लिए पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर असंतुष्ट सांसदों से संवाद शुरू किया है। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल उसके जनप्रतिनिधियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पार्टी सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का दावा कर रही है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
लोकसभा में एक सांसद के बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। सांसद ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर जो हालात दिखाई दे रहे हैं, उनका असर संसद में भी देखने को मिल सकता है। इसके बाद संसदीय दल में संभावित फेरबदल या विभाजन को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण के जरिए पार्टी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम असंतुष्ट नेताओं को साधने और संगठन पर नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
फिलहाल टीएमसी नेतृत्व संकट को नियंत्रित करने में जुटा है, लेकिन विधानसभा के बाद अब लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।