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सिर्फ डिग्री नहीं, मानवीय मूल्यों वाली शिक्षा चाहिए: दलाई लामा

आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने बदलते वैश्विक परिवेश में शिक्षा के स्वरूप पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान, अंक और रोजगार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार आज की पीढ़ी को ऐसी शिक्षा देने की आवश्यकता है, जो बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ करुणा, दया, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 31, 2026 11:40 am IST, Published 43 minutes ago

आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने बदलते वैश्विक परिवेश में शिक्षा के स्वरूप पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान, अंक और रोजगार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार आज की पीढ़ी को ऐसी शिक्षा देने की आवश्यकता है, जो बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ करुणा, दया, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों को भी विकसित करे।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया पहले की तुलना में अधिक जुड़ी हुई है। तकनीक और संचार के विस्तार ने देशों के बीच की दूरियां कम कर दी हैं, लेकिन इसके साथ ही नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे माहौल में बच्चों को केवल प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी सिखाना होगा कि दूसरों के प्रति संवेदनशील कैसे बनें, मतभेदों का सम्मान कैसे करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को कैसे समझें।

दलाई लामा का मानना है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल सफल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि अच्छे इंसान बनाना भी होना चाहिए। यदि शिक्षा में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की अनदेखी की जाएगी तो समाज में तनाव, असहिष्णुता और हिंसा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों और गतिविधियों को शामिल करना चाहिए, जो बच्चों में सहयोग, सहानुभूति और सकारात्मक सोच विकसित करें।

उन्होंने कहा कि आज के बच्चे डिजिटल दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां उन्हें कम उम्र में ही अपार जानकारी उपलब्ध हो जाती है। हालांकि जानकारी होना अच्छी बात है, लेकिन उसके सही उपयोग की समझ भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बच्चों को भावनात्मक संतुलन और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता नहीं सिखाई जाएगी, तो केवल तकनीकी ज्ञान उनके समग्र विकास के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

दलाई लामा ने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों का व्यक्तित्व केवल किताबों से नहीं बनता, बल्कि परिवार और विद्यालय के वातावरण से भी आकार लेता है। यदि माता-पिता और शिक्षक स्वयं करुणा, धैर्य और सम्मान का व्यवहार अपनाएंगे तो बच्चे भी इन्हीं मूल्यों को सहज रूप से सीखेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है। ध्यान, आत्मअनुशासन, संवाद और सकारात्मक सोच जैसी आदतें उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने में मदद कर सकती हैं। शिक्षा व्यवस्था में इन पहलुओं को स्थान देने से आने वाली पीढ़ी अधिक संतुलित और जिम्मेदार बन सकेगी।

आज की शिक्षा में जीवन कौशल, नैतिक शिक्षा और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। बदलती दुनिया में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही सफलता का पैमाना नहीं हैं। बेहतर समाज के निर्माण के लिए ऐसे नागरिकों की जरूरत है, जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ संवेदनशील और जिम्मेदार भी हों।

दलाई लामा का संदेश यह संकेत देता है कि भविष्य की शिक्षा केवल करियर निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर मानवता के निर्माण का आधार भी होनी चाहिए। यदि बच्चों को बचपन से ही दया, करुणा और सह-अस्तित्व का महत्व सिखाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफल होंगे, बल्कि समाज और विश्व में शांति तथा सद्भाव स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

 

 

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