परिसीमन पर तमिलनाडु में मोर्चाबंदी, विजय की बैठक से DMK ने बनाई दूरी

चेन्नई: लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली सरकार ने इस मुद्दे पर राज्य के राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की, लेकिन मुख्य विपक्षी दल DMK ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होने से इनकार कर […]

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  • August 9, 2026 12:00 pm IST, Published 1 hour ago

चेन्नई: लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली सरकार ने इस मुद्दे पर राज्य के राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की, लेकिन मुख्य विपक्षी दल DMK ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। बैठक में कांग्रेस, MDMK, TVK समेत कई दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का सुझाव सामने आया। इसमें राज्य की लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को सुरक्षित रखने की मांग प्रमुख रही। बैठक में शामिल नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि देश में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 सीटों को लेकर किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री विजय ने DMK के बैठक में शामिल नहीं होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों और हितों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को साथ आकर चर्चा करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, राज्य के राजनीतिक इतिहास में DMK की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और ऐसे मुद्दे पर उसकी भागीदारी जरूरी थी।

बैठक में कांग्रेस के सांसदों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने परिसीमन के मुद्दे पर राज्य सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि जनता को यह समझना चाहिए कि तमिलनाडु इसके विरोध में क्यों है। उनका तर्क रहा कि जनसंख्या के आधार पर यदि लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया जाता है तो उन राज्यों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।

तमिलनाडु सरकार की चिंता मुख्य रूप से दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर है। राज्य के नेताओं का मानना है कि यदि परिसीमन में जनसंख्या को प्रमुख आधार बनाया गया तो अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की लोकसभा सीटें बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के अपेक्षाकृत कम आबादी वाले राज्यों की सीटों का अनुपात प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। बैठक में इसी वजह से लोकसभा सीटों को लंबे समय तक स्थिर रखने का सुझाव दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार चाहती है कि राज्य की मौजूदा 39 लोकसभा सीटों में आने वाले कई दशकों तक कोई बदलाव न किया जाए। कुछ नेताओं ने 40 से 50 साल तक सीटों को स्थिर रखने की मांग का भी समर्थन किया।

परिसीमन को लेकर तमिलनाडु का विरोध नया नहीं है। राज्य की विभिन्न सरकारें पहले भी यह मुद्दा उठाती रही हैं। उनका कहना रहा है कि परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने वाले राज्यों को बाद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान नहीं उठाना चाहिए। मुख्यमंत्री विजय सरकार का कहना है कि दक्षिणी राज्यों के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा जरूरी है। राज्य सरकार पहले भी केंद्र के समक्ष अपनी चिंताएं रख चुकी है। केंद्र की ओर से अलग-अलग मौकों पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की आशंकाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

DMK का बैठक से दूर रहना इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना रहा है। DMK तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक ताकत है और उसके बिना सर्वदलीय बैठक की तस्वीर अधूरी नजर आई। मुख्यमंत्री ने भी इसी बात को रेखांकित करते हुए विपक्षी दल के रुख पर सवाल उठाया। अब विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी को इस पूरे विवाद में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो तमिलनाडु केंद्र सरकार के सामने अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट संदेश देगा।

इस मुद्दे पर आगे संसद और राष्ट्रीय राजनीति में भी बहस तेज होने की संभावना है। परिसीमन केवल सीटों की संख्या से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और केंद्र-राज्य संबंधों से भी है। ऐसे में तमिलनाडु का रुख आने वाले दिनों में अन्य दक्षिणी राज्यों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।फिलहाल मुख्यमंत्री विजय की सर्वदलीय बैठक और DMK के बहिष्कार ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर विधानसभा में प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा और इसके बाद केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु के रुख पर है।

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