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यूपी में बनेगा नया हाईस्पीड विंध्य एक्सप्रेसवे, गंगा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से होगा सीधा कनेक्शन; MP-बिहार समेत 4 राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा

लखनऊ/प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में सड़क और परिवहन नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के बाद अब राज्य में विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। यह नया हाईस्पीड कॉरिडोर न केवल प्रयागराज, […]

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  • June 13, 2026 10:30 am IST, Published 2 hours ago

लखनऊ/प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में सड़क और परिवहन नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के बाद अब राज्य में विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। यह नया हाईस्पीड कॉरिडोर न केवल प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिलों को आधुनिक सड़क संपर्क देगा, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों को भी सीधे तौर पर लाभ पहुंचाएगा।

करीब 330 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा विकसित किया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की दशकों पुरानी कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों को दूर करने के साथ-साथ आर्थिक विकास की नई संभावनाएं भी खोलेगी।

गंगा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से बनेगा मजबूत नेटवर्क

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि विंध्य एक्सप्रेसवे को राज्य के दो प्रमुख एक्सप्रेसवे—गंगा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे—से जोड़ा जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों के बीच एक मजबूत हाईस्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा।

योजना के अनुसार, एक्सप्रेसवे का शुरुआती बिंदु प्रयागराज के सोरांव क्षेत्र के जुड़ापुर दांडू गांव के पास होगा, जहां गंगा एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर प्रस्तावित है। इससे मेरठ, नोएडा, दिल्ली और एनसीआर से आने वाले वाहन सीधे विंध्य एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर सकेंगे।

वहीं मिर्जापुर के हमीदपुर गांव से लगभग 107 किलोमीटर लंबा लिंक रोड बनाया जाएगा, जो गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के अंतिम बिंदु से जुड़ जाएगा। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक पहुंच और अधिक आसान हो जाएगी।

चार राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ

हालांकि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के भीतर बनाया जा रहा है, लेकिन इसका प्रभाव कई राज्यों तक दिखाई देगा। विंध्य क्षेत्र भौगोलिक रूप से मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के नजदीक स्थित है। ऐसे में इन राज्यों के लोगों, व्यापारियों और उद्योगों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

विशेष रूप से मध्य प्रदेश के रीवा, सतना और सीधी जैसे जिलों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में इन क्षेत्रों से दिल्ली और एनसीआर तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

यात्रा समय होगा कम

सरकार की योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे पर वाहन लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकेंगे। इसके कारण प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से दिल्ली-एनसीआर तक की यात्रा पहले की तुलना में काफी कम समय में पूरी की जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना माल परिवहन के लिए भी गेम चेंजर साबित होगी। ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही तेज होने से लॉजिस्टिक लागत कम होगी और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।

84 गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

विंध्य एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित मार्ग प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों के कई क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। जानकारी के अनुसार, इसके लिए लगभग 84 गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। प्रशासन द्वारा भूमि सर्वेक्षण और प्रारंभिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।

भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा।

आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण बनेगा प्रोजेक्ट

यह एक्सप्रेसवे शुरुआती चरण में 6 लेन का होगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 8 लेन तक किया जा सकेगा। परियोजना में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं।

सोनभद्र के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में यातायात को सुगम बनाने के लिए सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा मिर्जापुर के पास गंगा नदी पर एक विशाल पुल भी बनाया जाएगा, जो इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण होगा।

107 किलोमीटर लंबे लिंक रोड पर 6 बड़े इंटरचेंज, 2 रेलवे ओवरब्रिज और 50 से अधिक अंडरपास प्रस्तावित हैं, जिससे स्थानीय यातायात प्रभावित न हो और हाईस्पीड ट्रैफिक निर्बाध रूप से चलता रहे।

22 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगी लागत

विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना पर लगभग 22 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक होगी।

सरकार को उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक हब, वेयरहाउस और नए निवेश केंद्र विकसित होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

पर्यटन और उद्योग को मिलेगा नया जीवन

विंध्य क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। विंध्याचल धाम, चुनार किला, सोनभद्र की पहाड़ियां और कई ऐतिहासिक स्थल हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

बेहतर सड़क संपर्क मिलने से इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे स्थानीय होटल, परिवहन और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी। साथ ही खनिज संपदा से भरपूर सोनभद्र और आसपास के क्षेत्रों के उद्योगों को भी बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।

पूर्वी यूपी के विकास का नया अध्याय

विंध्य एक्सप्रेसवे को केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार के रूप में देखा जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद यह कॉरिडोर राज्य के परिवहन नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद विंध्य क्षेत्र में निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश का यह इलाका राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।

फिलहाल परियोजना प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसके पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती हैं।

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