अखिलेश यादव लाएंगे ‘सत्ताईस का संकल्प’

आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने अपने पारंपरिक समर्थकों को साथ बनाए रखने के अलावा नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती भी होगी। PDA की अवधारणा के जरिए पार्टी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। वहीं, बीजेपी अपनी सरकार के कामकाज और संगठनात्मक ताकत के आधार पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने का प्रयास करेगी।

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  • October 19, 2026 10:30 am IST, Published 51 minutes ago

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को तेज करने के संकेत दे दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि समाजवादी पार्टी 26 नवंबर 2026 को अपना घोषणापत्र जारी करेगी। संविधान दिवस के अवसर पर जारी होने वाले इस दस्तावेज को पार्टी ने ‘सत्ताईस का संकल्प’ नाम दिया है। अखिलेश यादव के मुताबिक, यह घोषणापत्र PDA की उम्मीदों, जरूरतों और आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया जाएगा। इसके जरिए पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना राजनीतिक एजेंडा और जनता के सामने रखे जाने वाले प्रमुख मुद्दे स्पष्ट करेगी।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के अवसर पर ‘जन-मन घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा। पार्टी की ओर से इस्तेमाल किए गए इन नामों से संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी अपने चुनावी अभियान में संविधान, सामाजिक भागीदारी और आम लोगों से जुड़े सवालों को प्रमुखता देना चाहती है। हालांकि, घोषणापत्र में किन योजनाओं, नीतियों और वादों को शामिल किया जाएगा, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। ऐसे में राजनीतिक नजरें अब 26 नवंबर को होने वाली घोषणा पर टिकी हैं।

समाजवादी पार्टी की राजनीति में PDA का विशेष महत्व है। PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से है। पार्टी इस अवधारणा के माध्यम से समाज के इन वर्गों की राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और अधिकारों को अपने एजेंडे का अहम हिस्सा बनाती रही है। आगामी चुनाव को देखते हुए घोषणापत्र में इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को कितनी जगह मिलती है, यह महत्वपूर्ण होगा। रोजगार, शिक्षा, सामाजिक न्याय, किसानों की समस्याएं, महंगाई और युवाओं के भविष्य जैसे विषय भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर पार्टी की आधिकारिक घोषणाओं के लिए घोषणापत्र जारी होने का इंतजार करना होगा।

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य प्रतिस्पर्धा देखने को मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में बने रहने की कोशिश करेगी, जबकि अखिलेश यादव के सामने समाजवादी पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने और सत्ता में वापसी का लक्ष्य होगा। ऐसे राजनीतिक माहौल में चुनाव से कई महीने पहले घोषणापत्र जारी करने की घोषणा को पार्टी की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के लिए 2022 के विधानसभा चुनावों का प्रदर्शन भी आगामी रणनीति तय करने में अहम रहेगा। उस चुनाव में पार्टी ने 111 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसे करीब 32.06 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बावजूद पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। दूसरी ओर, बीजेपी ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और वह केवल एक सीट जीत पाई, जबकि उसका वोट प्रतिशत लगभग 12.88 रहा। कांग्रेस भी विधानसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल नहीं रही।

आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने अपने पारंपरिक समर्थकों को साथ बनाए रखने के अलावा नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती भी होगी। PDA की अवधारणा के जरिए पार्टी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। वहीं, बीजेपी अपनी सरकार के कामकाज और संगठनात्मक ताकत के आधार पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने का प्रयास करेगी।

‘सत्ताईस का संकल्प’ घोषणापत्र समाजवादी पार्टी के लिए केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखने का अवसर भी होगा। अब यह देखना अहम होगा कि पार्टी अपने घोषणापत्र में किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है और उसके प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के अलग-अलग वर्गों की अपेक्षाओं से किस हद तक जुड़ पाते हैं। 26 नवंबर को होने वाली घोषणा से 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा और समाजवादी पार्टी की रणनीति को लेकर तस्वीर कुछ और स्पष्ट हो सकती है।

 

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