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मेरठ में फर्जी जनसेवा केंद्र का भंडाफोड़, बाप-बेटे के पास मिले सैकड़ों दस्तावेज

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और लिसाड़ी गेट थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक कथित फर्जी जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है, जबकि उनका एक सहयोगी फरार बताया जा रहा है। आरोप है कि यह गिरोह […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 15, 2026 11:23 am IST, Published 2 hours ago

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और लिसाड़ी गेट थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक कथित फर्जी जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है, जबकि उनका एक सहयोगी फरार बताया जा रहा है। आरोप है कि यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर बैंक खाते, डेबिट कार्ड और अन्य वित्तीय सुविधाएं हासिल करता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से लिसाड़ी गेट क्षेत्र में कुछ जनसेवा केंद्रों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की सूचनाएं मिल रही थीं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन केंद्रों से तैयार किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब असम से प्राप्त एक शिकायत में बताया गया कि फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए खोले गए बैंक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और संदिग्ध केंद्रों पर नजर रखी।

संयुक्त टीम ने गोलाकुआं क्षेत्र स्थित एक जनसेवा केंद्र पर छापेमारी की। जांच में केंद्र के दस्तावेज और गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर संचालक अकरम और उसके पिता निजामुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि तीसरा आरोपी अबू बकर पुलिस कार्रवाई से पहले ही फरार हो गया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद की। इनमें दर्जनों डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड और विभिन्न संस्थानों की मुहरें शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों में किया जा सकता था।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न लाभों का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते और अन्य वित्तीय साधन तैयार किए जाते थे। इन खातों का उपयोग संदिग्ध लेनदेन और साइबर अपराधों से प्राप्त रकम के ट्रांसफर में होने की आशंका है।

पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। मामले की विस्तृत जांच के बाद अन्य खुलासे होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।

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