नोएडा DM मेधा रूपम को हाईकोर्ट का झटका, 5 लाख का मुआवजा

प्रयागराज/नोएडा: नोएडा के श्रमिक आंदोलन से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने करीब पांच महीने की हिरासत के लिए आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा […]

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  • September 6, 2026 8:20 pm IST, Published 55 minutes ago

प्रयागराज/नोएडा: नोएडा के श्रमिक आंदोलन से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने करीब पांच महीने की हिरासत के लिए आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इस राशि की वसूली गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से किए जाने का आदेश दिया गया है।

हालांकि, वायरल पोस्टर में जिस तरह यह दावा किया जा रहा है कि हाईकोर्ट ने नोएडा की डीएम को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है, वह सही नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने डीएम को जेल की सजा नहीं दी है। फैसला आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करने और उन्हें मुआवजा देने से संबंधित है।

क्या है पूरा मामला?

मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक 13 अप्रैल को मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के नाम भी शामिल थे। दोनों पर मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने जैसे आरोप लगाए गए थे और आकृति के खिलाफ NSA के तहत निरुद्धि की कार्रवाई की गई थी।

आकृति चौधरी ने NSA के तहत अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सरकार की ओर से हिरासत को सही ठहराने के लिए जो सामग्री और आरोप रखे गए, उन्हें लेकर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की NSA हिरासत?

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने हिरासत के आधार और सरकार द्वारा पेश किए गए तथ्यों की जांच की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने पाया कि आकृति चौधरी को इतने लंबे समय तक निरुद्ध रखने के लिए प्रस्तुत सामग्री पर्याप्त नहीं थी। अदालत ने उनकी NSA हिरासत को निरस्त करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी आवश्यक न हो।

कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि किसी व्यक्ति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे कड़े कानून के तहत कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त आधार का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश

इस मामले का सबसे अहम हिस्सा अदालत द्वारा दिया गया मुआवजा है। रिपोर्टों के मुताबिक हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को करीब पांच महीने की हिरासत के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। खास बात यह है कि अदालत ने इस रकम को गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से काटकर देने का निर्देश दिया है।

यही वजह है कि यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में है। हालांकि इसे डीएम मेधा रूपम की किसी आपराधिक दोषसिद्धि या जेल की सजा के तौर पर देखना सही नहीं होगा। मुआवजा देने का आदेश और किसी अधिकारी को आपराधिक रूप से दोषी ठहराना अलग-अलग कानूनी विषय हैं।

वायरल पोस्टर में क्या है गलत?

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में दावा किया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा डीएम मेधा रूपम को सुनवाई के दौरान छह महीने जेल में रहने और अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई है। इस दावे में दो अलग-अलग बातों को मिला दिया गया है।

पहली बात, 5 लाख रुपये का मुआवजा आकृति चौधरी को दिया जाना है। दूसरी बात, उपलब्ध खबरों में यह राशि डीएम मेधा रूपम के वेतन से काटे जाने का निर्देश बताया गया है। लेकिन हाईकोर्ट ने डीएम को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है—ऐसी बात उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में नहीं मिलती।

श्रमिक आंदोलन से जुड़ा था मामला

नोएडा में अप्रैल के दौरान श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन हुए थे। आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ने और हिंसा के आरोपों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की थी। इसी घटनाक्रम में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ मामलों में NSA जैसे कड़े कानून का इस्तेमाल किया गया।

आकृति चौधरी के मामले में हाईकोर्ट के फैसले ने NSA के इस्तेमाल और निरोधात्मक कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। अदालत का फैसला प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश माना जा रहा है कि निरुद्धि जैसे गंभीर कदम के लिए पर्याप्त और कानूनसम्मत आधार होना आवश्यक है।

मेधा रूपम को लेकर पहले भी हाईकोर्ट सख्त रहा

नोएडा की डीएम मेधा रूपम से जुड़े अन्य मामलों में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती सामने आ चुकी है। जुलाई 2026 में एक अन्य मामले में अदालत के आदेशों के अनुपालन को लेकर मेधा रूपम व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुई थीं और बिना शर्त माफी मांगी थी।

इससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। हालांकि अलग-अलग मामलों के आदेशों को आपस में जोड़कर किसी अधिकारी के खिलाफ व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अब इस आदेश के बाद आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, उनके खिलाफ यदि किसी अन्य मामले में कानूनी कार्रवाई लंबित है तो उसका असर अलग से देखा जाएगा। हाईकोर्ट द्वारा NSA हिरासत रद्द किए जाने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति से जुड़े सभी दूसरे आपराधिक मामले स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

कुल मिलाकर, इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला आकृति चौधरी की NSA हिरासत के खिलाफ बड़ी राहत है, जबकि डीएम मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का निर्देश इस मामले का सबसे चर्चित पहलू बन गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे “डीएम को छह महीने जेल की सजा” वाले दावे को तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

निष्कर्ष: वायरल पोस्टर में दी गई जानकारी का एक हिस्सा सही घटना पर आधारित है, लेकिन उसे सनसनीखेज तरीके से पेश किया गया है। हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द की और 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है; डीएम मेधा रूपम को छह महीने जेल की सजा दिए जाने की पुष्टि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से नहीं होती।

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