प्रयागराज: अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 वर्षीय सोनिका चौहान को अपनी पसंद के जीवनसाथी के साथ रहने की अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपने निजी जीवन और जीवनसाथी के चयन के संबंध में स्वयं निर्णय लेने का अधिकार है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका सोनिका के पति अकबर खान की ओर से दाखिल की गई थी। अकबर का आरोप था कि सोनिका को उसके पिता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने पास रखा हुआ है।
अदालत के निर्देश पर पुलिस सोनिका को सुनवाई के दौरान न्यायालय में लेकर पहुंची। कोर्ट ने सोनिका, उसके पति अकबर और उसके पिता से बातचीत कर उनके पक्षों को सुना। सोनिका ने अदालत के सामने कहा कि उसने अपनी इच्छा से अकबर से शादी की थी और वह उसके साथ रहना चाहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ने अगस्त 2022 में विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी की थी।
सोनिका ने यह भी बताया कि उसके फैसले को लेकर परिवार की ओर से उस पर दबाव बनाया जा रहा था। वहीं, उसके पिता ने विवाह पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर उसके पति की ओर से अनुचित प्रभाव डाला गया है। मामले की पृष्ठभूमि में मई 2025 में दर्ज पुलिस शिकायत भी रही। सोनिका के पिता की शिकायत के आधार पर अकबर के खिलाफ अपहरण और अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने अकबर को गिरफ्तार किया था और सोनिका को उसके माता-पिता के पास भेज दिया गया था। बाद में सोनिका ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह अपनी इच्छा से अकबर के साथ गई थी।
इसके बाद मामले में पुलिस स्तर पर भी कई कार्रवाई हुईं। अकबर की दोबारा गिरफ्तारी के अलावा उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण कानून के तहत जिले से बाहर करने की कार्रवाई का भी उल्लेख सामने आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य मुद्दा सोनिका की इच्छा और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा था। अदालत ने उससे सीधे बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि वह अपनी इच्छा से किसके साथ रहना चाहती है। सुनवाई के दौरान ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया, जिसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि सोनिका डर, दबाव या किसी अनुचित प्रभाव के कारण अपने पति के साथ रहने का फैसला कर रही है।
इसके बाद अदालत ने उसे अपनी इच्छा के अनुसार रहने की अनुमति दे दी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई। परिवार को भी उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया गया।
अदालत का यह आदेश मुख्य रूप से एक बालिग महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवनसाथी के साथ रहने के अधिकार से संबंधित है। इसका केंद्र किसी धर्म विशेष के पक्ष या विपक्ष में फैसला देना नहीं, बल्कि बालिग व्यक्ति की अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोनिका अपने पति अकबर के साथ रहने लगी हैं। हालांकि, इस मामले से जुड़े पहले के पुलिस मुकदमों और अन्य कानूनी कार्रवाइयों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। मौजूदा आदेश का प्रमुख विषय सोनिका की हिरासत और उसकी इच्छा के अनुसार जीवनसाथी के साथ रहने का अधिकार था।