अदृश्य आफत ‘लू’ से जंग में बचाव ही सबसे बड़ा हथियार

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र की ताजा चेतावनी ने उत्तर प्रदेश को सतर्क कर दिया है। 24 और 25 अप्रैल को प्रदेश में भीषण लू चलने की आशंका जताई गई है। राजधानी लखनऊ के विकास नगर और नोएडा समेत कई क्षेत्रों में हाल के अग्निकांडों ने गर्मी के विकराल रूप की झलक पहले ही दे दी […]

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  • April 23, 2026 11:24 am IST, Published 4 hours ago

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र की ताजा चेतावनी ने उत्तर प्रदेश को सतर्क कर दिया है। 24 और 25 अप्रैल को प्रदेश में भीषण लू चलने की आशंका जताई गई है। राजधानी लखनऊ के विकास नगर और नोएडा समेत कई क्षेत्रों में हाल के अग्निकांडों ने गर्मी के विकराल रूप की झलक पहले ही दे दी है। ईरान-अमेरिका युद्ध से उपजे जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। भारत में लू अब एक गम्भीर मौसमी आपदा के रूप में उभर रही है जिसे विशेषज्ञ ‘साइलेंट किलर’ का नाम दे रहे हैं, क्योंकि यह बिना शोर मचाए शरीर का पानी सोख लेती है और जीवन पर भारी पड़ जाती है।

इस अदृश्य आफत का सबसे क्रूर वार बुजुर्गों, मासूम बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों, दिहाड़ी मजदूरों, झोपड़ी-पट्टी में रहने वाले परिवारों और बेघर लोगों पर होता है। असंगठित क्षेत्र में खुले आसमान के नीचे पसीना बहाने वाले श्रमिकों के लिए तो हर दोपहर जानलेवा साबित हो सकती है। लगातार बढ़ता तापमान शरीर की कार्यप्रणाली को झकझोर देता है और समय पर उपचार न मिले तो स्थिति कुछ ही पलों में गम्भीर हो जाती है। गर्मी सहने की भी एक सीमा होती है और जब पारा उस सीमा को लांघता है तो इंसानी सेहत के साथ-साथ देश की उत्पादकता भी झुलसने लगती है। इसलिए हीट वेव से बचाव और जोखिम न्यूनीकरण की तैयारी अब विलासिता नहीं, जीवन की अनिवार्य शर्त बन चुकी है।

उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, कानपुर की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साफ किया कि तेज बुखार, लगातार उल्टी और दस्त लू के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल राहत के उपाय करें। भीगे गमछे या तौलिए को सिर पर रखें, चेहरे को ठंडे पानी से बार-बार पोछें। आम का पना, सत्तू का घोल, नारियल पानी, ओआरएस और ग्लूकोज का नियमित सेवन शरीर में खोए हुए लवण और पानी की भरपाई करता है। लू के प्रकोप को थामने का सबसे सरल मंत्र है कि प्यास न लगे तब भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी जैसे रसीले फलों और बेल, सौंफ, पुदीना, धनिया के शर्बत, छाछ, लस्सी, नींबू पानी को दिनचर्या में शामिल करें। हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहनें और दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें। बाहर जाना जरूरी हो तो छाता, गमछा, पानी की बोतल और टोपी को अपना सुरक्षा कवच बना लें।

बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष नजर रखना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे के पेशाब का रंग गहरा हो रहा है तो यह डिहाइड्रेशन का स्पष्ट संकेत है। उन्हें लगातार पानी पिलाएं और हमेशा पानी की बोतल साथ रखने की आदत डलवाएं। पास में पानी होने पर हम अनजाने में भी घूंट-घूंट पीते रहते हैं। किसी भी हालत में बच्चों या पालतू जानवरों को धूप में खड़ी गाड़ी में अकेला न छोड़ें, क्योंकि बंद वाहन मिनटों में भट्टी बन जाता है। लगातार धूप और लू के थपेड़े किडनी तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए खतरा दोगुना है। ऐसे में कार्यस्थल पर ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना, भारी काम सुबह या शाम के ठंडे पहर में कराना और दोपहर में छायादार विश्राम सुनिश्चित करना मालिकों की नैतिक जिम्मेदारी है।

शराब, चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और बासी-भारी भोजन से परहेज करें, क्योंकि ये शरीर को और निर्जलित करते हैं। खाना पकाने के लिए हवादार जगह चुनें और दिन के सबसे गर्म हिस्से में चूल्हा न जलाएं। अपने घर को ठंडा रखने के लिए पर्दे, शटर का इस्तेमाल करें, खिड़कियां खोलकर हवा आने दें और निचली मंजिल पर रहने को प्राथमिकता दें। पंखे चलाएं, शरीर को नम कपड़े से पोछें और दिन में दो बार ठंडे पानी से स्नान करें। कच्चे आम का पना इस मौसम का अमृत है। मिचली, गला सूखना, तेज बुखार, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

पालतू और दुधारू पशुओं को भी इस मौसम में विशेष देखभाल चाहिए। उन्हें दिन भर छायादार, हवादार जगह पर रखें, ताजा और ठंडा पानी दिन में कई बार दें, पानी में बर्फ के टुकड़े डाल दें और भोजन छांव में ही दें। हीट वेव से निपटना केवल व्यक्तिगत सावधानी का विषय नहीं है, यह सामाजिक और प्रशासनिक साझेदारी की मांग करता है। ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना, खराब हैंडपंप तुरंत ठीक कराना, चौपालों और स्वयं सहायता समूहों की बैठकों में लू से बचाव की जानकारी देना समय की मांग है।

सभी स्कूलों में पर्याप्त पेयजल और पंखों की व्यवस्था हो तथा बच्चों को हीट वेव से बचने के गुर सिखाए जाएं। अग्निशमन दल हर पल अलर्ट मोड पर रहें, जर्जर बिजली के खंभे और तार तुरंत दुरुस्त किए जाएं। गौशालाओं में गायों के लिए छाया, स्वच्छ पानी, हरा चारा और बीमार पशुओं के इलाज का पूरा इंतजाम हो। स्थानीय मौसम की सटीक जानकारी के लिए रेडियो, टीवी और विश्वसनीय अखबारों पर नजर रखें।

याद रखिए, पर्याप्त पानी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, भरपूर नींद और धूम्रपान-शराब से दूरी हमें इस साइलेंट किलर से बचा सकती है। रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित रखें, दर्द निवारक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें। सावधानी, सजगता और सामूहिक प्रयास से ही हम लू की इस जंग को जीत सकते हैं।

डॉ नन्दकिशोर साह

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