गाजीपुर में अफजाल अंसारी के हथियार मामले की जांच में नया मोड़

गाजीपुर: सपा सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पुराने शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के रिकॉर्ड से जुड़े मामले में शहर कोतवाली में उनके खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला कई दशक पहले खरीदी गई राइफल और रिवाल्वर के दस्तावेजों तथा वर्तमान स्थिति के सत्यापन से जुड़ा है। पुलिस […]

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  • July 28, 2026 6:35 pm IST, Published 12 minutes ago

गाजीपुर: सपा सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पुराने शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के रिकॉर्ड से जुड़े मामले में शहर कोतवाली में उनके खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला कई दशक पहले खरीदी गई राइफल और रिवाल्वर के दस्तावेजों तथा वर्तमान स्थिति के सत्यापन से जुड़ा है।

पुलिस के अनुसार, सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण हथियारों का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली और संबंधित रिकॉर्ड को तत्कालीन शस्त्र लिपिक से मिलीभगत कर अभिलेखागार से गायब कराया गया। इस मामले में तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमा शंकर वर्मा को भी नामजद किया गया है।

यह कार्रवाई पुलिस उपमहानिरीक्षक वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण के निर्देश पर चल रही जांच के तहत की गई है। जांच का दायरा दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी, उसके परिवार और आईएस-191 गिरोह से जुड़े लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों तक फैला हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह से संबंधित 51 शस्त्र लाइसेंसों की जांच की जा रही है, जिनमें कई हथियारों की खरीद और बिक्री का विवरण दर्ज है।

जांच के दौरान कई हथियारों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। पुलिस का कहना है कि कुछ मामलों में शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मूल दस्तावेज और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। ऐसे में हथियारों के इस्तेमाल और उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने में परेशानी आ रही है। सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1241/पी-11 की जांच में सामने आया कि वर्ष 1988 में इस लाइसेंस पर प्रतिबंधित बोर की राइफल खरीदी गई थी।

रिकॉर्ड के अनुसार, यह राइफल बाद में अरुणाचल प्रदेश के अलोंग स्थित एक हथियार विक्रेता को बेची गई थी। इसके बाद उसी फर्म से .32 बोर की रिवाल्वर खरीदी गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रिवाल्वर से संबंधित रिकॉर्ड में उसे सोल्ड यानी बेचा हुआ दर्ज किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि हथियार किसे बेचा गया। दस्तावेजों की कमी के कारण हथियार की वर्तमान स्थिति का पता नहीं लगाया जा सका।

जांच के दौरान संबंधित हथियार विक्रेता फर्म की ओर से बताया गया कि वर्ष 2001 में अलोंग स्थित फर्म के पुराने रिकॉर्ड आग लगने की घटना में नष्ट हो गए थे। वहीं, पश्चिम शियांग जिले के प्रशासनिक रिकॉर्ड में भी संबंधित हथियारों के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं मिली। पुलिस के अनुसार, शस्त्र लाइसेंस को वर्ष 2023 में जिलाधिकारी के आदेश से निरस्त किया जा चुका है। जांच एजेंसी ने सांसद अफजाल अंसारी को नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन अब तक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

इस मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हथियारों के रिकॉर्ड कैसे गायब हुए और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शस्त्र लाइसेंसों की यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब पुलिस प्रदेश में आपराधिक गिरोहों से जुड़े हथियारों और उनके रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है। प्रशासन का उद्देश्य पुराने लाइसेंसों की स्थिति स्पष्ट करना और अवैध हथियारों के संभावित इस्तेमाल को रोकना बताया जा रहा है।

 

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