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लखनऊ अग्निकांड पर गरमाई सियासत, अजय राय ने सरकार और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने घटना […]

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  • June 23, 2026 2:28 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने घटना को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अजय राय ने कहा कि जिस इमारत में आग लगी, उसके संबंध में पहले ही ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जा चुका था। उनका आरोप है कि यदि किसी भवन को अवैध घोषित किया गया था, तो उसके संचालन को रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐसी इमारतों में गतिविधियां जारी रहती हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय  ने संबंधित भवन में जितनी बिजली खपत की अनुमति थी, उससे कहीं अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था। उनके अनुसार, अत्यधिक लोड के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा और यह स्थिति हादसे की वजह बन सकती है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।घटना के दौरान बायोमेट्रिक गेट के लॉक होने का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि आग लगने के बाद गेट लॉक हो गए, जिससे अंदर मौजूद लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोग दरवाजे खोलने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यदि किसी भवन के खिलाफ पहले से कार्रवाई का आदेश था, तो उसे लागू करने में देरी क्यों हुई। कांग्रेस का कहना है कि केवल हादसे के बाद जांच बैठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अजय राय ने मांग की कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समय पर कदम उठाए जाते, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था।

लखनऊ की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भवन सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक हो रहा है। इसके अलावा आपातकालीन निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर और बिजली के सुरक्षित उपयोग जैसी व्यवस्थाओं की नियमित जांच भी आवश्यक है। यदि इन नियमों का पालन नहीं होता, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने संवेदना व्यक्त की है। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए भविष्य में सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। केवल जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करने के बजाय तत्काल सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा घटना की जांच की जा रही है और विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और किन स्तरों पर लापरवाही हुई। हालांकि इस हादसे ने एक बार फिर शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

 

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