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एक देश-एक चुनाव पर गरमाई सियासत, अजय राय ने संघीय ढांचे की दी दलील

लखनऊ: ‘एक देश-एक चुनाव’ (वन नेशन-वन इलेक्शन) के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक के बीच इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्वरूप में यह व्यवस्था देश के हित में नहीं […]

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ajay Rai
Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 2:42 pm IST, Published 56 minutes ago

लखनऊ: ‘एक देश-एक चुनाव’ (वन नेशन-वन इलेक्शन) के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक के बीच इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्वरूप में यह व्यवस्था देश के हित में नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि भारत की संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने वर्षों से देश को मजबूती दी है और किसी भी बड़े बदलाव से पहले उसके व्यापक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अजय राय ने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन पर आधारित है। उनके अनुसार संविधान में स्थापित संघीय ढांचे का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुधारों का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन किसी भी परिवर्तन को लागू करने से पहले उसके सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन और व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव में कई व्यावहारिक और संवैधानिक चुनौतियां हैं। उनके अनुसार यदि लोकसभा या किसी राज्य विधानसभा का कार्यकाल समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में चुनावी प्रक्रिया कैसे संचालित होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का समाधान किए बिना इतनी बड़ी व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा।

अजय राय ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना जिससे राज्यों के अधिकारों या संघीय ढांचे पर असर पड़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं और ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर सभी राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और राज्यों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।

दरअसल, ‘एक देश-एक चुनाव’ का प्रस्ताव लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है। इसके समर्थकों का तर्क है कि लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ होने से चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, विरोधी दलों का कहना है कि इस व्यवस्था से भारत के संघीय ढांचे, राज्यों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ सकता है।

इसी मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न पक्षों से सुझाव और राय ले रही है। समिति का उद्देश्य प्रस्ताव के संवैधानिक, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करना है, ताकि भविष्य में इस विषय पर ठोस निर्णय लिया जा सके। ‘एक देश-एक चुनाव’ केवल चुनावी सुधार का विषय नहीं है, बल्कि यह संविधान, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। ऐसे में इस पर सभी पक्षों की राय और विस्तृत चर्चा भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

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