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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला! दान की रकम से खरीदी 1.5 करोड़ की जमीन, कर्मचारी हिरासत में

अयोध्या: देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दान राशि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के दानपात्र में जमा होने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने प्रशासन और मंदिर […]

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  • June 14, 2026 2:30 pm IST, Published 1 hour ago

अयोध्या: देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दान राशि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के दानपात्र में जमा होने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि चढ़ावे की रकम से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अवैध तरीके से संपत्ति बनाई और करोड़ों रुपये का निवेश किया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां लंबे समय से संदेह के घेरे में थीं। हाल ही में की गई जांच में एक कर्मचारी के नाम पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन खरीदे जाने की जानकारी मिली। इतना ही नहीं, कुछ अन्य कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में भी अचानक हुए बदलाव ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान एक कर्मचारी के आवास पर छापेमारी की गई, जहां से लाखों रुपये नकद बरामद किए गए। अधिकारियों का मानना है कि यह रकम मंदिर में आने वाले चढ़ावे से जुड़ी हो सकती है। हालांकि बरामद धनराशि के स्रोत की पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल संबंधित कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उसके बैंक खातों, संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

बताया जा रहा है कि मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु बड़ी मात्रा में नकद दान, सोना-चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाते हैं। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं चढ़ावे की रकम को व्यवस्थित तरीके से गबन कर निजी संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं।

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई नेताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बढ़ते विवाद को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया है। तीन सदस्यीय टीम को पूरे प्रकरण की जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच दल मंदिर में दान संग्रह की प्रक्रिया, कर्मचारियों की भूमिका, वित्तीय रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन-देन की विस्तृत जांच करेगा।

राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी मामले पर प्रतिक्रिया दी गई है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और नियमित ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है और सच्चाई सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर के श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र राम मंदिर में दान राशि को लेकर उठे सवालों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को फिर से तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें SIT जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि दान की रकम का वास्तव में दुरुपयोग हुआ है या नहीं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला हाल के वर्षों में धार्मिक संस्थानों से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय विवादों में से एक माना जा सकता है।

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