फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित मामलों का 78% बोझ उत्तर प्रदेश पर

 13.74 लाख से अधिक केस पेंडिंग नई दिल्ली। देशभर की फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित मामलों का करीब 78 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। यहां 373 फास्ट ट्रैक अदालतों में 13.74 लाख से अधिक मामले निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत न्याय विभाग से प्राप्त आंकड़ों […]

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  • August 27, 2026 7:35 am IST, Published 18 seconds ago

 13.74 लाख से अधिक केस पेंडिंग

नई दिल्ली। देशभर की फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित मामलों का करीब 78 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। यहां 373 फास्ट ट्रैक अदालतों में 13.74 लाख से अधिक मामले निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत न्याय विभाग से प्राप्त आंकड़ों में सामने आई है।

न्याय विभाग के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 884 फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही थीं। इन अदालतों में 17.5 लाख से अधिक मामले लंबित थे। ये आंकड़े नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में न्याय विभाग ने 10 अगस्त को साझा किए।

फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संबंधित हाई कोर्ट से परामर्श के बाद विशेष प्रकार के मामलों की तेजी से सुनवाई और निस्तारण के लिए किया जाता है। हालांकि, न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन अदालतों की स्थापना के लिए राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से कोई केंद्रीय वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश सबसे आगे

लंबित मामलों के मामले में उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों से काफी आगे है। राज्य में 373 फास्ट ट्रैक अदालतों में 13.74 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। यह देशभर की फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित कुल मामलों का करीब 78 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र का स्थान है। महाराष्ट्र में 117 फास्ट ट्रैक अदालतें संचालित हैं, जहां करीब 1.35 लाख मामले लंबित हैं।

अन्य राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। पश्चिम बंगाल में 93,245, तमिलनाडु में 89,703 और असम में 17,145 मामले फास्ट ट्रैक अदालतों में लंबित पाए गए हैं।

दिल्ली में 26 अदालतों में 7,385 मामले लंबित

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी फास्ट ट्रैक अदालतों में हजारों मामले लंबित हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 26 फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही हैं और इनमें 7,385 मामले निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं।

वहीं, सिक्किम में सबसे कम लंबित मामले दर्ज किए गए। यहां दो फास्ट ट्रैक अदालतों में सिर्फ 18 मामले लंबित पाए गए।

कई राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतें नहीं

आंकड़ों के मुताबिक देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फिलहाल एक भी फास्ट ट्रैक अदालत संचालित नहीं हो रही है। इनमें बिहार, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड शामिल हैं।

फास्ट ट्रैक अदालतों का उद्देश्य गंभीर और विशेष प्रकार के मामलों का जल्द निस्तारण करना है, लेकिन बड़ी संख्या में लंबित मामलों से न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव और मामलों के समय पर निपटारे को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की अत्यधिक संख्या इस चुनौती को और गंभीर बनाती है।

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