वॉशिंगटन/तेहरान। वर्षों से तनाव, प्रतिबंधों और कूटनीतिक टकराव के दौर से गुजर रहे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों देशों के बीच जारी बातचीत के बीच ऐसी खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका ईरान की लंबे समय से फ्रीज की गई करीब 25 अरब डॉलर की संपत्तियों को रिलीज करने पर विचार कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना, सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान निकालना और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में आगे बढ़ना है। इसी क्रम में ईरान की विदेशों में फंसी संपत्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसकी अरबों डॉलर की राशि विदेशी बैंकों में प्रतिबंधों के कारण अटकी हुई है। तेहरान का कहना है कि यह धन देश की वैध संपत्ति है और उसे वापस मिलना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका का रुख यह रहा है कि किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा किए जाने वाले ठोस कदमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के पालन से जोड़ा जाएगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में फ्रीज संपत्तियों की रिहाई को एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह योजना अमल में आती है तो ईरान को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी धनराशि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, बुनियादी ढांचे के विकास और विभिन्न आर्थिक परियोजनाओं को गति देने में मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मामला अभी शुरुआती चरण में है और 25 अरब डॉलर की राशि को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में इससे कम राशि का उल्लेख किया गया है, जबकि कुछ में इससे अधिक आंकड़े भी बताए गए हैं। ऐसे में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि किसी संभावित समझौते के तहत फंड्स की रिहाई एक प्रक्रिया के तहत होगी। यानी ईरान द्वारा तय शर्तों को पूरा करने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों की संतुष्टि के बाद ही धनराशि जारी की जा सकती है। इससे स्पष्ट है कि यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता सफल होता है, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। क्षेत्र में स्थिरता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है। तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके सकारात्मक प्रभाव की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हुई है। क्या वास्तव में ईरान को उसकी जमी हुई संपत्तियां वापस मिलेंगी और क्या यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत साबित होगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिणाम पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
(नोट: 25 अरब डॉलर की राशि को लेकर विभिन्न दावे सामने आए हैं। इस संबंध में किसी भी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।)