कराकस (वेनेजुएला)। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। बुधवार (25 जून) को आए दो लगातार शक्तिशाली भूकंपों और उसके बाद के कई आफ्टरशॉक्स ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस आपदा में अब तक 589 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,980 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 39,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
भूकंप वाले दिन यानी बुधवार को वेनेजुएला में ‘काराबोबो युद्ध’ (1821) की याद में राष्ट्रीय अवकाश था। छुट्टी होने के कारण ज्यादातर लोग अपने घरों में मौजूद थे और फीफा वर्ल्ड कप का मैच देख रहे थे। यही वजह है कि अचानक आई इस आपदा में बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढही हुई इमारतों के मलबे के नीचे से अभी भी लोगों के चिल्लाने और मदद मांगने की आवाजें आ रही हैं।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस आपदा से सबसे अधिक नुकसान ला गुआइरा राज्य में हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ पीड़ितों तक खाना-पानी पहुंचाने के लिए सेना को तैनात कर दिया गया है।
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कहा: > “दुनियाभर से पहुंचे बचाव दलों का हम स्वागत करते हैं। हमारी टीमें मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं। हम हार नहीं मानेंगे।”
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुमान ने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है। USGS के मुताबिक:
भूकंप के मलबे और भयावहता को देखते हुए 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है।
वहीं, मरने वालों का आंकड़ा 1 लाख के पार जाने की 30% आशंका जताई गई है।
इस भीषण तबाही से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को करीब 9.5 लाख करोड़ रुपए का भारी नुकसान होने का अनुमान है।
इस संकट की घड़ी में भारत वेनेजुएला के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज से फोन पर बात कर इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। पीएम मोदी ने भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजने की पेशकश की है। अंतरराष्ट्रीय राहत दल और खोजी कुत्ते (सूंघने वाले दस्ते) मलबे में जिंदगियों को तलाशने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।