तेहरान/बेरूत। मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। लेबनान में इजरायल द्वारा किए गए ताजा सैन्य हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में हुए युद्धविराम और शांति प्रयासों का उल्लंघन किया गया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। इसी के विरोध में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को सीमित करने और मार्ग को बंद करने का फैसला लिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों—सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और इराक—से निर्यात होने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि यह मार्ग वास्तव में बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल तेज हो गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका है। तेल आयात पर निर्भर देशों, विशेषकर भारत, जापान और यूरोपीय देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन सकती है।
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्ण रूप से बंद होने को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और पश्चिमी अधिकारियों ने कहा है कि समुद्री यातायात की निगरानी की जा रही है और अभी तक सभी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुकने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद क्षेत्र में बढ़ा तनाव वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
उधर, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। वाशिंगटन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए तत्काल संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टकराव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहां हर नया घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने की क्षमता रखता है। आने वाले दिनों में ईरान और इजरायल की रणनीति तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस संकट की गंभीरता को निर्धारित करेगी।