बीजिंग: चीन इस समय आर्थिक चुनौतियों, रियल एस्टेट सेक्टर के संकट और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इन परिस्थितियों का सबसे अधिक असर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है। ऐसे माहौल में चीन में एक नया और अनोखा उद्योग तेजी से उभरकर सामने आया है, जिसे “इमोशनल वैल्यू इकोनॉमी” (Emotional Value Economy) कहा जा रहा है। यह ऐसा कारोबार है जिसमें लोगों को भावनात्मक सहारा, खुशी, बातचीत और मानसिक राहत देने के बदले पैसे लिए जाते हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र का बाजार अब करीब 400 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
क्या है इमोशनल वैल्यू इकोनॉमी?
इमोशनल वैल्यू इकोनॉमी का मतलब उन सेवाओं से है जो लोगों की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करती हैं। इसमें ऑनलाइन चैटिंग, मोटिवेशनल बातचीत, दोस्त की तरह साथ देना, तनाव कम करने वाली गतिविधियां, लाइव स्ट्रीमिंग, डिजिटल काउंसलिंग, गेमिंग कम्युनिटी, पालतू जानवरों से जुड़े अनुभव और मनोरंजन आधारित सेवाएं शामिल हैं।
इन सेवाओं का उद्देश्य लोगों को कुछ समय के लिए तनाव से राहत देना और उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराना होता है।
युवाओं में क्यों बढ़ रही है इसकी मांग?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में युवाओं के सामने रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं। कई क्षेत्रों में वेतन वृद्धि रुक गई है और नौकरी को लेकर असुरक्षा बढ़ी है। ऐसे में बड़ी संख्या में युवा मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
इसी कारण वे अब महंगी वस्तुओं पर खर्च करने के बजाय ऐसे अनुभवों पर पैसा खर्च कर रहे हैं जो उन्हें खुशी, सुकून और भावनात्मक संतुलन प्रदान करें। यही वजह है कि इमोशनल वैल्यू आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
खुशी भी बन गई कमाई का जरिया
इस नए कारोबार की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई युवा खुद भी इसे रोजगार के रूप में अपना रहे हैं। कोई ऑनलाइन दोस्त बनकर लोगों से बातचीत करता है, कोई लाइव स्ट्रीम के जरिए मनोरंजन करता है, तो कोई प्रेरणादायक कंटेंट बनाकर कमाई कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप और डिजिटल कम्युनिटी इस पूरे इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। लाखों लोग इन प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी सेवाएं बेच रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिल रहा बड़ा बढ़ावा
चीन में डिजिटल तकनीक का तेजी से विस्तार इस कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों को आसानी से जोड़ रहे हैं। अब कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में ऐसी सेवा खरीद सकता है, जिससे उसे भावनात्मक सहयोग या मनोरंजन मिल सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट और वर्चुअल साथी (Virtual Companion) जैसी तकनीकें भी इस बाजार का हिस्सा बनती जा रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता
कोविड महामारी के बाद दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है। चीन भी इससे अछूता नहीं है। पहले जहां लोग मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने से बचते थे, वहीं अब युवा तनाव, अकेलेपन और चिंता जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।
इसी बदलाव ने इमोशनल सर्विस इंडस्ट्री को तेजी से आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब किसी देश में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं भी बदलने लगती हैं। लोग भौतिक वस्तुओं की तुलना में ऐसे अनुभवों पर अधिक खर्च करते हैं जो उन्हें मानसिक संतोष दें।
मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि यदि ऐसी सेवाएं जिम्मेदारी और नैतिक मानकों के साथ संचालित हों तो ये तनाव कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि गंभीर मानसिक समस्याओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा और काउंसलिंग की आवश्यकता बनी रहती है।
क्या दुनिया के अन्य देशों में भी बढ़ेगा यह ट्रेंड?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में डिजिटल इमोशनल सर्विसेज का बाजार तेजी से बढ़ सकता है। बढ़ती डिजिटल लाइफस्टाइल, अकेलापन और तनाव इस क्षेत्र की मांग को बढ़ा रहे हैं।
भारत सहित कई देशों में भी कंटेंट क्रिएशन, लाइव स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन कम्युनिटी और डिजिटल वेलनेस सेवाओं का विस्तार इसी दिशा का संकेत माना जा रहा है।
चीन में 400 अरब डॉलर का इमोशनल वैल्यू बाजार यह दिखाता है कि आधुनिक दौर में लोगों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। आर्थिक चुनौतियों के बीच मानसिक शांति, खुशी और भावनात्मक सहयोग अब केवल व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि एक बड़े उद्योग का रूप ले चुके हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है और लाखों लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है।