जकार्ता/योग्याकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय सफल इंडोनेशिया दौरा संपन्न हो गया है। अपने दौरे के अंतिम दिन बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित देश के सबसे बड़े और भव्य प्रम्बानन मंदिर परिसर पहुंचे। यह1,200 साल पुराना मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। दोनों नेताओं ने यहां भारत-इंडोनेशिया सहयोगात्मक सांस्कृतिक विरासत संरक्षण परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
मंदिर परिसर में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें जीवन के हर पड़ाव पर किसी न किसी रूप में भगवान शिव से जुड़ने का सौभाग्य मिला है।
“मेरा जन्म वडनगर में हुआ, जहां हाटकेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर है। गुजरात में मुझे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के विकास की जिम्मेदारी मिली। मेरी राजनीतिक कर्मभूमि काशी है, जहां काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद हमेशा मिला। मुझे केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और उज्जैन के महाकाल मंदिर के विकास से जुड़ने का अवसर भी मिला। अब करीब 1200 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य से जुड़ना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के लोगों और वहां की सरकार का इस प्राचीन हिंदू धरोहर को 1,200 साल से अधिक समय तक सहेजकर रखने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वह 2029 से पहले इस मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने पर इसके उद्घाटन समारोह में शामिल होने पुनः इंडोनेशिया आएंगे।
दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर: जावा द्वीप पर स्थित यह परिसर एशिया का दूसरा सबसे विशाल हिंदू मंदिर है, जबकि पहला स्थान कंबोडिया के अंगकोर वाट का है।
त्रिमूर्ति को समर्पित: इस प्राचीन परिसर में भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा के मुख्य मंदिर हैं, जिसमें 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर सबसे बड़ा है।
रामायण का अंकन: मंदिर की दीवारों पर महाकाव्य रामायण और अन्य पौराणिक हिंदू ग्रंथों की कथाएं अत्यंत सुंदरता के साथ उकेरी गई हैं।
इंडोनेशिया का दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अगले चरण के लिए ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना हो गए हैं, जहां दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को और अधिक विस्तार दिए जाने की संभावना है।