नई दिल्ली/ढाका। साल 2024 में तख्तापलट के बाद से भारत में शरण लेकर रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान दिया है। हसीना ने एलान किया है कि वह इस साल (2026) के अंत तक हर हाल में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि उनके खिलाफ हो रही साजिशों या मौत की धमकियों से वह डरने वाली नहीं हैं।
वहीं, बांग्लादेश की मौजूदा सरकार और उनके राजनीतिक विरोधियों ने हसीना के इस बयान को देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को बिगाड़ने और सरकार पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया है।
एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने अपनी पार्टी ‘अवामी लीग’ को केवल एक संगठन नहीं बल्कि एक बड़ी ताकत बताया। उन्होंने अपनी वापसी पर स्थिति साफ करते हुए कहा:
“मेरी वापसी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है। यह बांग्लादेश के लोगों के राजनीतिक अधिकार, लोकतंत्र की बहाली, कानून का शासन और हमारे मुक्ति संग्राम (1971 Liberation War) की भावना की रक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं और अन्य) पर होने वाला कोई भी हमला, देश की स्वतंत्रता पर हमला है।
जब शेख हसीना से पूछा गया कि सत्ताधारी बीएनपी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों में मिली मौत की सजा और दर्जनों मुकदमों की याद दिला रहे हैं, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से जवाब दिया:
“साजिशों से नहीं डरती”: हसीना ने कहा, “1975 में मैंने अपने माता-पिता, भाइयों और पूरे परिवार को खो दिया था। मुझ पर ग्रेनेड हमले भी हुए। लेकिन हर जाल को तोड़कर मैं जनता के साथ खड़ी रही। मुझे मौत का कोई डर नहीं है।”
सजा को बताया अवैध: उन्होंने अपने खिलाफ सुनाए गए मौत की सजा के अदालती फैसलों को पूरी तरह अवैध, असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित बताया।
हसीना ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली मौजूदा बीएनपी सरकार और इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज बांग्लादेश में कोई लोकतंत्र या कानून का शासन नहीं बचा है। देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा चुकी है, अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं और उग्रवाद तेजी से पैर पसार रहा है।
ढाका के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अवामी लीग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चुपके से फिर से सक्रिय हो रही है। यही वजह है कि तारिक रहमान सरकार ने अवामी लीग के सदस्यों को स्थानीय चुनावों में ‘निर्दलीय’ के रूप में उतरने की अनुमति दी है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का रुख: पीएमओ से जुड़े सूत्रों ने हसीना के दावों को खारिज करते हुए कहा, “हम बिल्कुल चिंतित नहीं हैं। यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है। हमारी सरकार भारी बहुमत से चुनी गई है और जनता हमारे साथ है।”
जमात-ए-इस्लामी का बीएनपी पर सवाल: जमात के प्रमुख एटीएम अजहरुल इस्लाम ने अपनी ही सहयोगी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बीएनपी अंदरखाने अवामी लीग का पुनर्वास करने और उसे फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रही है?